Home » Kundali details online2

Kundali details online2

Navgrah

कुंडली की सम्पूर्ण जानकारी के लिए आपको इस पोस्ट को भी पढना होगा जिससे आपको Kundali details online की सम्पूर्ण जानकारी हो सके.

सुप्त गृह :

जिस घर में कोई गृह बैठा हुआ हो, उसके सामने वाले घर में कोई गृह न हो तो वह सुप्त गृह कहलाता है.

उदाहरण :

पहले घर में यदि ब्रहस्पति बैठा हो और उसके सामने वाले यानी सातवें घर में कोई गृह न हो तो पहले घर में बैठगे ब्रहस्पति का फल उस जातक को उसके बिवाह के पश्चात् ही मिलेगा. इस लिए सातवें घर में ब्रहस्पति की चीजों को स्थापित करके उसको जगाया जा सकता है इसी प्रकार दुसरे अन्य ग्रहों को भी जगाया जा सकता है.

कुर्बानी देने वाले गृह :

लाल किताब की ज्योतिष पद्धति में एक बहुत ही महत्वपूर्ण द्रष्टिकोण ग्रहों के स्वभावों को समझने का है. कई बार यह देखने में आता है, कोई गृह जन्मकुंडली में अच्छी स्थिति में है, किन्तु उससे संबंधित फल पूरी तरह प्राप्त नहीं हो पाता. यह स्थिति कुर्बानी दर्शाती है.

ग्रहों की कुर्बानी या बलिदान का अर्थ है – एक गृह अपने घर पर दुसरे किसी गृह की स्थिति को ख़राब कर देता है. वह अपना फल देने के बजाय किसी दूसरे गृह के फल को भी ख़राब कर देता है. इस बात को हम कुछ इस तरह समझ सकते हैं.

कुर्वानी देने वाले गृह :

शनि :

Shani

शत्रु ग्रहों से अपने आपको सुरक्षित रखने तथा अपने प्राण बचने के लिए शनि ने राहु-केतु को रक्षक के रूप में अपने पास रखा है. ये रक्षक शनि की दुखदायी स्थिति में शनि को बचने के लिए किसी दूसरे गृह की बलि दे सकते है.

उदाहरण : राहु-केतु मिलकर जब शनि की हालत ख़राब करते हैं तब शनि की जगह्ग शुक्र की कुर्बानी की जा सकती है. अतः शुक्र का अच्छी स्थिति में होना जरुरी है अन्यथा शनि-सूर्य के झगड़े में जातक की पत्नी पर बहुती बुरा प्रभाव पड़ेगा. वह बीमार हो जायेगी. ईएसआई हालत में न सूर्य बरबाद होगा और न शनि, क्योकि ये दोनों बाप-बेटे हैं. लेकिन इसका असर शुक्र पर अवश्य पड़ेगा.

बुध :

Budh

बुध : यह चालक गृह है और पारे की तरह अपना विचार बदलता रहता है और यह अपना कर्तव्य नहीं निभाता है. जब कभी बुध कष्ट की स्थिति में होता है तो वह अपने मित्र गृह शुक्र को मुसीबत में डालकर अपना बचाव कर लेता है, अपनी बला शुक्र के गले में दाल देता है.

मंगल :

अशुभ मंगल अपने लिए केतु को कुर्बानी का बकरा बनता है. ग्रहों की बनावट अनुसार अशुभ मंगल के बनावटी अंश सूर्य और शनि हैं. जब अशुभ मंगल ख़राब होकर बुरे असर करेगा, तब अपनी कुर्बानी के लिए अपने बेटे पर असर दाल देगा. इसका कारण है की मंगल के बनावटी अंश सूर्य और शनि आपस में बाप-बेटे हैं. इसका प्रभाव शनि पर ज्यादा पड़ेगा जो बेटे का करक है.

शुक्र :

शुक्र चन्द्र को कुर्बानी का बकरा बनता है. शुक्र स्त्री चंचल, शरारती स्वभाव की होती है, खुद अपनी मुसीबत चन्द्र यानी जातक की माता पर दाल देती है. यदि चन्द्र और शुक्र मुकाबले के गृह हों तो माता की आँखों पर इसका बुरा प्रभाव होगा.

ब्रहस्पति :

ब्रहस्पति ने अपने चेले या मित्र केतु को कुर्बानी के लिए पाल रखा है. जब ब्रहस्पति पर बुरा प्रभाव पड़ता है तब वह अपनी मुसीबत को केतु पर दाल देता है.

उदहारण : ब्रहस्पति पांचवें घर में हो और केतु किसी एनी घर में तथा ब्रहस्पति की अशुभ दशा आ जाए तो केतु के छठे घर का फल अशुभ हो जाएगा. पांचवां घर सन्तान का है. उसका बुरा नहीं होगा.

सूर्य :

सूर्य अपनी मुसीबत में केतु पर मंदा असर डालता है.

चंद्र :

चंद्र अपने मित्र गृह – ब्रहस्पति, मंगल, सूर्य पर अपना कुछ प्रभाव डालकर स्वयं बुरी स्थिति से बच जाता है.

राहु-केतु :

राहु-केतु ही दो ऐसे गृह हैं जो अपनी मुसीबतें खुद भोगते हैं. अपना संकट किसी और के गले में नहीं डालते. लेकिन इन ग्रहों के कारण कारोबार, रिश्तेदार पर इनका असर पद सकता है. रहू ख़राब होने पर सेल या बहनोई पर असर पद सकता है.केतु ख़राब होने पर बेटे पर असर पड़ सकता है या अपने पैरों में कोई खराबी आ सकती है.

वर्षफल में जब भी कोई गृह पहले घर में आता है तो वह अपना प्रभाव सर्वप्रथम उस घर पर डालेगा जिसमें वह बैठा है. उसके बाद शत्रु गृह, किसी भी घर में बैठे हों उन पर और उसके पश्चात् मित्र ग्रहों पर प्रभाव डालेगा.

Leave a Reply

Your email address will not be published.