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“Jivan sambandhi prashn uttar hindi mein”

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प्रश्न 1 – शारीरिक और मानसिक शांति रहेगी या नहीं ?

उत्तर – यदि करतल तमाम रेखाओं से भरा हुआ होता है तो ऐसे व्यक्ति को प्रायः शारीरिक और मानसिक अशांति रहती है. यह लक्षण न होने पर शारीरिक और मानसिक शांति रहती है.

प्रश्न 2 -क्या शारीरिक पीड़ा रहेगी ही ?

उत्तर – यदि व्यक्ति के हाथ में आयुरेखा जंजीर या चैन की शक्ल की होगी तो उसे शारीरिक पीड़ा रहेगी ही. यदि आयुरेखा सीधी और साफ़ होती है तो शारीरिक पीड़ा नहीं रहती है.

प्रश्न 3 -कोई कठिन पीड़ा तो नहीं होगी, यदि होगी तो कब होगी और उससे पीछा छूटेगा या नहीं ?

उत्तर – (क) करतल में आयुरेखा भग्न होने से कठिन पीड़ा होती है.

(ख) जिस अवस्था में आयुरेखा भग्न होती है, वही पीड़ा का साल है.

(ग) एक हाथ की आयुरेखा में भग्न (टुटा हुआ) चिन्ह होने से कठिन पीड़ा होकर आरोग्यलाभ हो जाता है, परन्तु यदी दोनों ही हाथों की आयुरेखा में भग्न चिन्ह् होता है तो म्रत्यु की संभावना रहती है.

प्रश्न 4 – स्वास्थ्य (तंदुरुस्ती) ठीक भी रहेगा या नहीं ?

उत्तर – (क) करतल में मर्श्ल्रेखा रहने से व्यक्ति उत्तम स्वास्थ्य का भोग रहता है.

(ख) करतल में दो स्वास्थ्य रेखायें रहने पर व्यक्ति स्वस्थ रहता है.

(ग) करतल में त्रिभुजाकार चिन्ह न रहने पर व्यक्ति की तंदुरुस्ती अच्छी नहीं रहती है.

(घ) करतल में दो भाग्यरेखाएं रहने पर व्यक्ति में स्वास्थ्य हीनता रहती है.

(ड) विवाहरेखा की दो शाख्यें होकर यदि उनमें से एक शाखा ह्रदय रेखा से मिलती है तो एसा पुरुष या स्त्री की स्वास्थ्य हानि होती है.

प्रश्न 5 -मानसिक अशांति तो नहीं रहेगी ?

उत्तर – करतल में ह्रदय रेखा भग्न होने पर व्यक्ति को मानसिक अशांति रहती है.

प्रश्न 6 – जीवन शांतिमय रहेगा या नहीं ?

उत्तर – करतल में भाग्य रेखा सुस्पस्ट (बिल्कुल साफ़-साफ़) होकर शनि के क्षेत्र (माध्यम अंगुली के निचे का स्थान ) तर्जनी अंगुली के निचे का स्थान ) में उजाकर समाप्त हो जाती हो तो ऐसे योग वाले व्यक्ति का जीवन शांतिमय रहता है. यह योग न होने पर जीवन शांतिमय नहीं रहता है.

प्रश्न 7 – विषाद (इष्ट यानी इच्छा के विषय के नाश में मन के टूटने को विषद कहते हैं ) या विपत्ति ( धन, बंधू आदि के नाश को विपत्ति कहते हैं ) का प्रसंग तो नहीं है ?

उत्तर – करतल में शनि बंधनी रेखा रहने पर व्यक्ति को विषद और विपत्ति का प्रसंग होता है.

प्रश्न 8 – विपत्ति या दुर्घटना से रक्षा भी होगी या नहीं ?

उत्तर – (क) यदि अनामिका अंगुली के तीसरे पर्व में कोई टेढ़ी-मेढ़ी रेखायें प्रकाश पाती हैं तो व्यक्ति की विपत्ति या दुर्घटना से रक्षा हो जाती है.

(ख) गुरु के क्षेत्र में चतुष्कोण चिन्ह होने से व्यक्ति, विपत्ति से उद्धार पा लेता है.

(ग) करतल में भाग्य रेखा के ऊपर चतुष्कोण चिन्ह होने से व्यक्ति की भीषण विपत्ति से भी रक्षा हो जाती है.

प्रश्न 9 -जीवन दुःख कष्ट में तो नहीं बीतेगा ?

उत्तर – आयुबर्धनी रेखा जंजीर की तरह होने से व्यक्ति का जीवन दुःख कष्ट में बीतता है.

प्रश् 10 – जीवन में दरिद्रता और दुर्दशा तो नहीं है ?

उत्तर – (क) करतल में भग्न या टेढ़ी-मेढ़ी भाग्यरेखा रहने से व्यक्ति दरिद्रता और दुर्दशा से ग्रस्त रहता है.

(ख) शनि के क्षेत्र में जलाचिंह रहने से व्यक्ति की दुर्दशा रहती है.

प्रश्न 11 – दीर्घ जीवन है या नहीं ?

उत्तर – यदि स्वास्थ्य रेखा, आयुरेखा से अलग होती है तो व्यक्ति का दीर्घ जीवन होता है.

प्रश्न 12 – दीर्घ जीवन तथा चिरकालीन सुख होगा या नहीं ?

उत्तर – यदी भायालैसिभा रेखा सुस्पस्ट तथा अखंडित (बिना टूटी) होती है तो व्यक्ति का जीवन दीर्घ होता है और वह चिरकालिक सुख का भोग करता है.

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