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Jeevan Rekha

इस रेखा को आयु रेखा, पितृ रेखा गोत्र प्रगूढ रेखा भी कहते हैं, यह रेखा अंगूठे और तर्जनी के बीच से प्रारंभ होकर गोलाई बनती हुई, शुक्र क्षेत्र को घेरती हुई मणिबंध या उसके समीप तक जाती है ।

जीवन रेखा सुन्दर, पुष्ट और गोलाई लिए  हो तो जातक स्वस्थ दीर्घायु, एश्वर्य युक्त होता है ।

यह रेखा खंडित होतो जातक को असफलता और अपमान का सामना करना पड़ता है ।

जीवन रेखा चलते हुए बिच में जातक पतली और कमजोर हो जाए तो जीवन के उस भाग में जातक की सेहत कुछ ख़राब रहती है ।

यदि जीवन रेखा पिली सी हो और छोड़ी हो तो जातक की सेहत कमजोर रहती है, स्वभाव भी कुछ बुरा होता है। ईर्ष्यालु स्वभाव भी हो सकता है ।

जीवन रेखा लाल रंग की और गहरी हो तो जातक को क्रोधी स्वभाव होता है । अक्सर उसे बुखार हो सकता है ।

हाथ में स्पस्ट लम्बी जीवन रेखा हो, परन्तु भाग्य रेखा और सुर रेखा न हो तो जीवन नीरस, एक जैसा रहता है, कोई खास घटना नहीं होती । पैसे इकट्ठा करने के कम अवसर आते  है ।

बारह्स्पति के क्षेत्र के निचे जीवन रेखा ज्न्जिर्दार हो तो बचपत में सेहत अच्छी नहीं रहती है ।

चन्द्र पर्वत को छूती हुई जीवन रेखा शुक्र के पर्वत को अधिक घेरे में लेती है तो उसकी लम्बाई बढ़ जाती है । इस दशा में व्यक्ति की आयु बढ़ जाती है ।

अगर जीवन रेखा वृहस्पति के क्षेत्र से आरम्भ होती है तो मनुष्य की कोई बड़ी आकांक्षा पूरी होती है ।

जीवन रेखा, मस्तिक रेखा के आरम्भ से ही अलग चलती है तो व्यक्ति में अथाह इवान शक्ति होती है और उसमें आगे बढ़ने की भावना रहती है । यह उनके लिए लाभदायक है जो स्टेज पर भीड़ के सामने भाषण देते हैं । उपदेशकों, वकीलों, अध्यापकों तथा अभिनेताओं के लिए यह अच्छा योग है ।

अगर जीवन रेखा छोटी हो तो जातक की उम्र भी थोड़ी होती है ।

जीवन रेखा छोटी हो परन्तु स्वतन्त्र ( अर्थात जीवन रेखा से न जुडी हो ) स्वास्थ्य रेखा सीधी बुध के पर्वत तक जाए तो यह छूटती जीवन रेखा के दोष को समाप्त करती है ।

दोनों हाथों में जीवन रेखा छोटी हो तो आयु की गणना करके देखें, यहाँ यह समाप्त होती हिया, वहाँ ही जीवन का अंत समझें ।

जीवन-सेरखा, एक अच्छी मस्तिक रेखा के शुरू में ही कुछ फासले पर हो तो जातक किसी भी विषय पर बहुत जल्दी से निर्णय लेता है, किसी भी हालत में अपना फैसला जल्दबाजी में सुनाता है जिसके कई बार प्रतिकूल परिणाम निकल सकते बार पतिकुल परिणाम निकल सकते हैं ।

जीवन रेखा सीढ़ीनुमा बनी हुई हो जैसा की आक्रति में दिखाया गया हो मनुष्य का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता । अगर पूरी लाइन ऐसी हो तो सारा जीवन एसा रहता है । या रेखा के जिस भाग में ईएसआई स्थिति हो, आयु के उस भाग में स्वास्थ्य में खराबी रहे ।

जीवन रेखा, जंजीर दार हो तो जातक का शारीर बड़ा नाजुक होता है, स्नायु दौर्बल्य, शारीर में कोई न कोई दर्द रहता है ।

जीवन रेखा के आरम्भ में फोर्क बनता हो तो व्यक्ति वफादार होता है, उस पर विश्वास किया जा सकता है ।

जीवन रेखा से एक शाखा ब्रहस्पति क्षेत्र को चीरती हुई चली आए तो जातक अपनी महत्वाकांक्षा में सफलता हासिल करता है ।

जीवन रेखा के दोनों और निचे को शाखाएं हो तो यह धन और सेहत की हानि का संकेत समझा जाना चाहिए ।

जीवन रेखा के दोनों और ऊपर की और खाखएं हों, तो स्वास्थ्य ठीक रहता है,

महत्वाकांक्षाएं पूर्ण होती है और जीवन में पर्याप्त मात्र में धन मिलता है ।

जीवन रेखा से शाखाएँ निकल कर मस्तिष्क रेखा के मध्य भाग को छुटी है तो यह जातक को मान सम्मान और धन दिलाती है ।

जीवन रेखा के आरंभ से ही एक बड़ी शाखा अर्घव्रत बनती हुई मणिबन्ध तक आयें तो जातक को अक्सर सिरदर्द की शिकायत रहती है ।

जीवन रेखा के अंत में फोर्क बनता हो तो यह वृद्धावस्था में शारीरिक कमजोरी, अधिक श्रम और गरीबी का संकेत है ।

जीवन रेखा पूरी होने से पहले समाप्त हो जाए और उसके समाप्ति स्थल पर काला बिंदु हो तो यह दुर्घटना ग्रस्त म्रत्यु लाता है ।

जीवन रेखा बिच में ही समाप्त हो जाए और उसके सामानांतर कुछ रेखायें हों तो यह अचानक म्रत्यु तो होती है पर अचानक नहीं ।

जीवन रेखा के अंत में बड़ा फोर्क बनता है तो जीवन के अंतिम भाग में आमबात रोग दर्शाता है । व्यक्ति की म्रत्यु गरीबी में अपने जन्म स्थान से दूर कहीं होती है ।

जीवन रेखा के अंत में बन्ने वाले फोर्क की एक शाखा चंद्र्पर्वत तक कलाई की और आए तो यह लम्बी समुद्र यात्रा का सूचक है ।

जीवन रेखा के अंत में दो-तिन क्रास बने हुए हों तो जातक गुणवान और मिलनसार होते हुए भी सफलता से दूर रहता है तथा बुढ़ापे में गरीबी और सेहत में खराबी देखनी पड़ती है ।

जीवन रेखा अंत में पुच्छ्लदार रेखा बन जाए तो जातक को अंतिम जीवन में धनहानि होने के कारण गरीबी देखनी पड़ती है ।

जीवन रेखा से ऊपर उठने वाली शाखाओं को ब्रभाव रेखाएं काटें । जितने शाखाएँ काटें, उतने ही मुकद्दमे होगे और क़ानूनी तलाक होगा ।

जीवन रेखा अंतिम भाग में पुच्छ्लदार बन जाए और उससे एक शाखा चन्द्र पर्वत तक आए तो जातक क्रैक मस्तिष्क का होता है ।

जीवन रेखा उदगम स्थान पर मस्तिक रेखा तथा ह्रदय रेखा से जुडी हुई हो तो यह अचानक म्रत्यु की सूचक होती है ।

जीवन रेखा के समाप्ति स्थल पर बहुत बड़ी तिरछी रेखाएं काटे और बिच में भाग्य रेखा भी सम्मिलित हो तो बचपन की गलतियों से बुढ़ापे में जातक की सेहत ख़राब होती है ।

जीवन रेखा के आरम्भ में दो-तिन फोर्क बनें ( ब्रहस्पति क्षेत्र के नीचे ) तो जातक के माता-पिता को मान-सम्मान तथा बड़ा धन लाभ हो, जिससे जातक को भी बाद में लाभ रहे ।

ऊपर बन्ने वाले फोर्क क्रास में बदल जाएँ तो मुकद्दमें हरने का योग बनता है जिससे मान-सम्मान और धन की हनी होती है ।

जब जीवन रेखा के दो तिहाई भाग पर एक शाखा नीचे की और जाए तो जीवन शक्ति में कम होने का संकेत है ।

जीवन रेखा के दो-तिहाई हिस्से पर एक शाखा उभर कर चन्द्र क्षेत्र पर आए तो जातक घुमने फिरने का शौक़ीन होता है, मन अशांत और अस्थिर रहता है । एक जगह टिकता नहीं । अगर जीवन रेखा के केंद्र में काला बुंडू होकर उसमें एक छोटी शाखा नीचे  आए तो यह जोड़ दर्द, गठिया रोग की सूचक है ।

जीवन रेखा टूट कर सीढ़ीनुमा बनी हो तो जीवन के इतने भाग में जातक की लगातार सेहत ख़राब रहे ।

जीवन रेखा बीच में टूटी हो और जीवन रेखा के दोनों टुकड़ों को एक छोटी रेखा क्रास करके मिलाती हो तो यह भयानक बीमारी के बाद आराम आना बताती है ।

जीवन रेखा बिच में टूटी हुई हो और दोनों टुकड़े एक वर्ग द्वारा मिलाये गए हों तो यह किसी बड़े शारीरिक कास्ट से बचाव दर्शाता है ।

जीवन रेखा का एक टुकड़ा भाग्य रेखा में मिल जाता है तो यह किसी बड़े खतरे के टलने का संकेत है ।

जीवन रेखा बीच में टूटी हुई हो और दोनों हिस्से वाली रेखायें टूटने पर कुछ देर समानान्तर चलें तो किसी बड़ी बीमारी के बाद जातक आराम पाता है । परन्तु अगर दोनों रेखायें शुक्र पर्वत की और मुड जाए तो म्रत्यु का संकेत है ।

जीवन रेखा बीच में से मुड कर चन्द्र पर्वत तक चली आए, तो गंभीर स्त्री रोग होने की सूचना देती है ।

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