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Grah nakshatra

Grah Nakshatra
Grah Nakshatra

Woman’s kundali :

पहला स्थान :

1- जिस स्त्री के छोटे स्थान में शनि, सूर्य, रहू, केतु, ब्रहस्पति अथवा मंगल इनमें से कोई गृह बैठा हो तो वह स्त्री सदाचारिणी और पति की अत्यन्त सेवा करने वाली होती है. छोटे स्थान में चन्द्रमा हो तो विधवा करता है और उक्त स्थान में बुध बैठा हो तो वह स्त्री वेश्या अथवा नित्य कलह करने वाली हिती है.

दूसरा स्थान :

2-जिस स्त्री के सूर्य सप्तम हो तो वह पति को त्याग दें, मंगल सप्तम हो तो विधवा हो, शनि हो तो बहुत बड़ी का विवाह हो, चंद्रमा हो तो सुन्दर हो, बुध हो तो सौभाग्यवती ब्रहस्पति हो तो सर्व सुख वाली, शुक्र हो तो भोग भोगने वाली भाग्यवती हो.

तीसरा स्थान :

3- जिस स्त्री के अष्टम स्थान में ब्रहस्पति अथवा बुध बैठे हो उसका अपने पति से बियोग रहता है, चंद्रमा, शुक्र तथा रहू, केतु स्थित हों तो उसका मरण होता है, सूर्य विधवा करता है मंगल सदाचरण करने वाली बनता है और शनिश्चर उस स्थान में हो तो उसके बहुत पुत्र हों तथा वह स्त्री अपने पति की प्यारी हो.

चौथा स्थान :

4- जिस स्त्री के बुध, शुक्र, सूर्य और ब्रहस्पति नवम स्थान में हों तो उस स्त्री की बुद्धि धर्म आचरण करने वाली हो, मंगल रोग उत्पन्न करता है, शनि विधवा करता है तथा चंद्रमा सन्तान उत्पन्न करता है.

पांचवा स्थान :

5- कर्म अथवा दशम स्थान में जिस स्त्री के रहू स्थित हो वह विधवा होती है, सूर्य और शनि पाप में प्रीति करते हैं, मंगल धन का नाश और म्रत्यु करता है, चंद्रमा उसी स्त्री को कुलता, परपुरुष से प्रीति, एनी गृह धनवती और सुभगा करते हैं.

छठा स्थान :

6- जिस स्त्री के ग्यारहवें स्थान में सूर्य हो तो वह सुपुत्र्वती होती है, उसी स्थान में मंगल पड़ा हो तो उसे पुत्र की सदैव अभिलाषा बनी रहे. चंद्रमा धनवती करता है वृहस्पति आयु में वृद्धि करते हैं और बुध, रहू, केतु विधवा कर देते हैं तथा शुक्र अनेक प्रकार के धन का लाभ करते हैं.

सातवाँ स्थान :

7- बारहवें स्थान में जिस स्त्री के ब्रहस्पति हो तो विधवा करते हैं. सूर्य दरिद्र (धनहीन ) कर देता है. चंद्रमा धन खर्च कराता है. रहू, केतु कुलटा (व्यभिचारिणी) करता है, यदि उस स्थान में शुक्र पौत्र युक्त करके सह्रदयी बनाता है.

आठवां स्थान :

8- जिस स्त्री के लग्न में सूर्य और मंगल हों वह स्त्री विधवा होती है और रहू केतु सन्तान का नाश करते हैं, शनि हो तो दरिद्रा होती है, शुक्र या बुध अथवा ब्रहस्पति हो तो साध्वी (भली ) हो और चंद्रमा हो तो आयु कम करता है.

नवां स्थान :

9- सूर्य, शनि, रहू, केतु और मंगल यह गृह दुसरे स्थान में स्थित हों तो वह स्त्री अत्यंत दरिद्र औरी दुखिता होती है. ब्रहस्पति, शुक्र या बुध स्थित हो तो वह स्त्री सौभाग्यवती और अधिक धनवती होनी चाहिए और चंद्रमा बहुत पुत्रवती करता है.

दसवां स्थान :

10- जिस स्त्री के तीसरे स्थान में शुक्र, चंद्रमा, मंगल, ब्रहस्पति, सूर्य अथवा बुध इनमें से कोई गृह बैठा हो तो वह स्त्री पतिव्रता, अनेक पुत्रों वाली और धन सम्पन्न होती है, शनि बैठा हो तो उसके विशेष धन होता है, उसी स्थान में रहू केतु भी बिद्यमान हों तो शारीर को पुष्ट करते हैं.

ग्यारहवां स्थान :

11- चतुर्थ स्थान में मंगल अथवा सूर्य स्थित हो तो उस स्त्री के दुग्ध स्वल्प अर्थात थोडा होता है, चंद्रमा सौभाग्य और शुशिलता का नाश करता है. रहू, केतु हों तो उसके सपत्नी अधिक होती हैं और उसको भूमि तथा धन का लाभी होता है. बुध, ब्रहस्पति और शुक्र हों तो उसे अनेक प्रकार के शुख की प्राप्ति होती है.

बारहवां स्थान :

12-मंचम स्थान में यदि सूर्य अथवा मंगल हो तो संतान को कष्ट कराता है. बुदेह, ब्रहस्पति और शुक्र हो तो वह स्त्री अनेक पुत्र वाली होती है. रहू, केतु मरण करता है. शनि प्रबल रोग उत्पन्न करता है और यदि चंद्रमा उक्त स्थान हो तो कन्या अधिक होती हैं.

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