Gemstones

नवरत्न (Nine Gems) एक प्रसिद्ध हिन्दी शास्त्रीय उपाय है जो ज्योतिष शास्त्र में प्रयुक्त होता है। नवरत्न नौ प्रमुख रत्नों का संयोजन होता है, जिन्हें निम्नलिखित होते हैं: माणिक्य (Ruby), पन्ना (Emerald), मोती (Pearl), मनिक्य (Coral), पुखराज (Yellow Sapphire), गोमेद (Hessonite), नीलम (Blue Sapphire), कटिला (Cat’s Eye), दियमंड (Diamond)।

नवरत्न के फायदे निम्नलिखित हो सकते हैं:

आध्यात्मिक और शारीरिक लाभ:

नवरत्नों का प्रयोग व्यक्ति की आध्यात्मिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार के लिए किया जाता है।

ग्रहों की शांति: ज्योतिष में माना जाता है कि ग्रहों के संतुलन में कुछ अशुभ प्रभाव हो सकते हैं, जिन्हें नवरत्नों से निवारण किया जा सकता है।

धन और सफलता:

यह रत्न व्यापारिक और व्यवसायिक सफलता को बढ़ावा देने के लिए प्रयुक्त होते हैं।

रोग निवारण:

नवरत्नों का प्रयोग शारीरिक और मानसिक बीमारियों से बचाव में किया जा सकता है।

विवाह और पारिवारिक सुख:

नवरत्न विवाह में सुख और समृद्धि के लिए भी प्रयुक्त होते हैं।

शिक्षा और ज्ञान:

नवरत्नों का प्रयोग शिक्षा और ज्ञान के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए किया जा सकता है।

गर्भधारण और प्रसव:

माणिक्य और मोती को गर्भधारण और प्रसव से संबंधित मुद्दों के लिए प्रयुक्त किया जा सकता है।

बुद्धिमता और मानसिक स्थिति:

पुखराज, पन्ना और नीलम को मानसिक स्थिति को सुधारने और बुद्धिमता को बढ़ावा देने के लिए माना जाता है।

समर्पण और सद्गुण:

नवरत्न धार्मिक और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैं और व्यक्ति को समर्पित और सद्गुणी बनाने में सहायक हो सकते हैं।

नवरत्न

१-हीरा – यह सर्वाधिक कठोर और मूल्यवान रत्न होता है . यह सफ़ेद, गुलाबी, काले रंग में पाया जाता है. ज्योतिष की द्रष्टि से यह शुक्र गृह का प्रतिनिधि रत्न माना गया है.
२- पन्ना -यह हरा या सफ़ेद मिश्रित हरे रंग का रत्न होता है. यह पारदर्शी तथा अपारदर्शी दोनों ही प्रकार का होता है. इसे बुध गृह का प्रतिनिधि रत्न माना जाता है.
३- पुखराज -यह पीले अथवा सफ़ेद रंग का रत्नीय पत्थर होता है. यह पारदर्शी होता है. ज्योतिष की द्रष्टि से इसे ब्रहस्पति का प्रतिनिधि रत्न माना जाता है.
4 – नीलम – नीलम मोर की गर्दन के सामान गहरे नील रंग का अथवा पारदर्शी हल्के नील रंग का रत्न होता है. गहरे नील रंग के नीलम को बैंकाक का नीलम कहते हैं. हल्के नील रंग के पारदर्शी नीलम को सीलोनी नीलम कहते हैं. यह शनि गृह का प्रिनिधि रत्न होता है.
५ – माणिक – यह रत्न लाल रंग का श्रेष्ठ होता है, किन्तु श्याम वर्ण-मिश्रित लाल रंग के भी माणिक होते हैं. इसे सूर्य का पतिनिधि रत्न माना जाता है. जहाँ तक इसके प्रभाव का प्रश्न है लाल व् श्याम-मिश्रित लाल रंग वाले, दोनों का प्रभाव सामान ही होता है.
6 – मूंगा – यह प्रायः लाल, सिंदूरी तथा सफ़ेद रंगों का होता है. इसे मंगल गृह का प्रतिनिधि माना गया है.
7 – मोती – मोती प्रायः सफ़ेद रंग का आबदार रत्न होता है. साथ ही यह हलके गुलाबी तथा हलके पीले रंगों में भी प्राप्त होता है. ज्योतिषीय द्रष्टि से इसे चंद्रमा का रत्न माना गया है.
8 –गोमेद – यह कालापन लिए हुए लाल रंग का अथवा पीलापन मिश्रित लाल रंग का होत्ता है. साथ ही यह गौमूत्र के रंग का भी होता है. इसे राहु गृह का प्रित्निधि माना गया है.
9 – लहसुनिया – (cat’s eye ) इनका रंग कुछ कालापन लिए हुए हरा या पीला भी होता है. इसमें बिल्ली की आँख के समान धारी होने से इसे बिड़ालाक्ष भी कहते हैं. यह केतु गृह का प्रतिनिधि रत्न होता है.

यह फायदे आमतौर पर नवरत्नों के प्रयोग की जाने वाली कुछ क्षेत्रिय संभावित फायदे हैं, लेकिन यदि आप नवरत्नों का प्रयोग करना चाहते हैं, तो आपको एक प्रमाणित ज्योतिषी से परामर्श लेना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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