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Chandr Grah Vichar

chandra grah

” चन्द्र पर्वत ” ” चन्द्र विचार “

छठा पर्वत चंद्रमा का माना जाता है. यह नाम इसलिए  दिया गया है, क्योकि हाथ के जिस भाग से उसकी पहिचान होती है, क्योंकि हाथ के जिस भाग से उसकी पहचान होती है, उस भाग को चन्द्र पर्वत कहा जाता है. अलग-अलग या संयुक्त चिन्ह, नक्षत्र, त्रिकोण, व्रत, एक मात्र उठती हुई रेखा, वर्ग या त्रिशूल चन्द्र पर्वत की शक्ति को बढ़ाते हैं.

जाल, गुणन चिन्ह, तिरछी रेखाएं, द्वीप, बिंदु या नक्षत्रों के विकर्त रूप इस पर्वत के दोषों को व्यक्त करते हैं, जिनका सम्बन्ध हाथ की रंगत, नाख़ून तथा एनी बातों के दोषों को व्यक्त करते हैं, जिनका सम्बन्ध हाथ की रंगत, नाख़ून तथा अन्य बैटन के कारण उत्पन्न स्वास्थ्य या चरित्रगत दोषों के साथ होता है.

चन्द्र पर्वत की परख हाथ के बहार की और उसके घुमाव या मोड़ और हथेली के भीतर बनी गद्दी के आकार को धयान में रखकर की जानी चाहिए. यदि बहार की और बास्तव में कोई उभार-सा बनता हो, तो उसे सुविकसित पर्वत मानेंगे.

हाथ के अन्दर वाले भाग पर बड़ी-सी गद्दी बन्ने व् मोटा होने की दशा में यह पर्वत अत्यधिक प्रबल होगा. यदि बहार का उभार एवं मोठी गद्दी दोनों असामान्य रूप से बड़ी हों, तो ऐसे जातक पर चन्द्र की अतिशय प्रभाव माना जाएगा.

यदि पर्वत पर ऊपर उठती रेखाएं हों, तो ऐसे जातक की शक्ति में वृद्धि हिती है और तिरछी रेखाएं उसके दोषों को उजागर करती है. पर्वत की लम्बाई तक या उसके लगभग पहुचने वाली कोई प्रगाढ़ रेखा इसको अत्तिरिक्त शक्ति देने वाली होती है ओर साथ-साथ चलने वाली एसी कई रेखाएं हों, तो उसे भी शक्ति में वृद्धि का संकेत मानते हैं.

किनारे पर विकसित, किन्तु हथेली में सपाट पर्वत पर भी ये रेखाएं उतनी ही शक्तिशाली होती है, जितनी शक्तिशाली और सुविकसित पर्वत में होती हैं. यदि बहार की और उभर और हथेली में स्थित बड़ी-सी गद्दी पर एक गहरी, सुस्पष्ट रेखा या रेखाएं हों, तो चन्द्र प्रधान जातक चरम सीमा तक जा सकता है.

इस पर्वत को भी तिन भागों में विभाजित किया जाना चाहिए. उच्च, माध्यम, और निचला. यह विभाजन गुणों के हिसाव से अँगुलियों के तीनों लोंकों के अनुरूप होगा और प्रयेक भाग इस वर्ग के व्यक्ति की विशिष्ट स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं को जानने में सहायक सिद्ध होगा.

पर्वत पर जाल या आदि-तिरछी रेखाए, विकर्त नक्षत्र, द्वीप, विन्दु जंजीर जैसी या लहरदार रेखाएं स्वास्थ्य के दोषों को व्यक्त करेंगी. इसके रहने पर पर्वत के सम्बन्ध में हाथ की रंगत, नाख़ून, जीवन रेखा और बुध रेखा से स्वास्थ्य संकेतों की जाच अवश्य की जानी चाहिए. स्त्रियों के मामले में व्यक्तिगत बिमारियों पर सीधी प्रभाव डालने के कारण चन्द्र पर्वत के स्वास्थ्य विकारों का अध्ययन करना आवश्यक है.

इस पर्वत के उछ, मध्य और निचले त्रतीय भागों में से प्रयेक भाग स्वास्थ्य की अलग-अलग समस्याओं को दर्शाता है. जव किशी विशेष भाग में दोष या विकार दीखते हैं, तो यह बात निश्चित हो जाती है की पर्वत के उस विशेष भाग से सम्बंधित स्वास्थ्य समस्याएं विधमान हैं. इस प्रकार न केवल जातक के स्वास्थ्य की विक्रति का पता लगता है,

बल्कि यह भी स्पष्ट किया जा सकता है की वह खराबी क्या है. हाथ के किनारे पर जो आदि रेखाएं होती है, उन्हें गलती से यात्रा-रेखाओं का नाम दे दिया गया है. कड़ी रेखाओं के लिए कहा जाता है की वे जलमार्ग से यात्रा का संकेत है, तिरछी रेखाएं भू-मार्ग से यात्रा दर्शाती हैं और पुराने हस्त्रेखाविदों द्वारा की गई इन व्याख्याओं का स्त्रोत इस तथ्य को माना जाता है की चन्द्र घराने के व्यक्ति की पानी में विशेष रूचि होती है.

वह स्वभाव से स्नायविक, अधीर और व्याकुल रहता है, उसे बदलाव लाना या यात्रा कारण अच्छा लगता है और जब चन्द्र पर्वत पर स्पष्ट गाढ़ी रेखाएं हों, तो ये जातक को भ्रमण के लिए सीधी रेखाएं, जो उसके यात्रा-प्रेम और पानी से विशेष रूप से प्यार होने की पुष्टि करती हैं, उसे भू-मार्ग के बजे जलमार्ग से यात्रा करने के लिए प्रेरित करती हैं. यही वह तर्क है, जिसके आधार पर सीधी-कड़ी रेखाओं को यात्रा का संकेत देने वाली रेखाएं माना गया.

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