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Ganga ji ki aarti in hindi

ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता !जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता !!ॐ जय गंगे माता …..चन्द्र सी ज्योति तुम्हारी, जल निर्मल आता !शरण पड़े जो तेरी, सो नर टार जाता !!ॐ जय गंगे माता …..पुत्र सागर के तारे, सब जग को ज्ञाता !कृपा द्रष्टि हो तुम्हारी, त्रिभुवन सुख डाटा !!ॐ जय गंगे माता …..एक बार जो… Read More »Ganga ji ki aarti in hindi

Aarti Ambe ji ki in hindi

जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरीतुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरीजय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी …मांग सिंदूर विराजत, तिको मृगमद कोउज्जवल से कोऊ नयना, चन्द्र बदन नीकोजय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी …कनक सामान कलेवर रक्ताम्बर राजेरक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजेजय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी …के हरि वहाँ रजत, खड्ग खप्पर धरीसुर नर… Read More »Aarti Ambe ji ki in hindi

आरती श्री लक्ष्मी जी की

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता !तुमको निशदिन सेवत, हर विष्णु धाता !! ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता …उमा, रमा, ब्रहमाणी, तुम ही जग माता !!सूर्य-चंद्रमा श्यावत, नारद ऋषि गाता ! ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता …दुर्गा रूप निरंजनी, सुख-संपत्ति दाता !!जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता ॐ जय लक्ष्मी माता,… Read More »आरती श्री लक्ष्मी जी की

Anguliyon se jaane bhagy

Anguliyon se jaane bhagy अँगुलियों से जानें भाग्य

भारतीय सामुद्रिक चार्यों ने अँगुलियों के सोलग प्रकार बताये है. 1- अवलित या सुपष्ट अंगुली – एसा जातक धनवान, भाग्यवान व् यशवान होता है. 2- छोटी अंगुली – एसा जातक बुद्धिमान व् बात को शीघ्र समझने वाला होता है. 3- लम्बी अंगुली – एसा व्यक्ति संतान व् परिवार वाला दीर्घायु होता है. 4- चपटी अंगुली – ऐसा व्यक्ति निर्धन, क्रोधी… Read More »Anguliyon se jaane bhagy अँगुलियों से जानें भाग्य

Jap ke fayde

Jap karne ka sahi tarika

जप के पूर्व की चौबीस मुद्राएँ :- 1- सुमुखम – दौनों हाथों की अँगुलियों को मोडकर परस्पर मिलाये. 2- सम्पुटम – दौनों हाथों को फुलाकर मिलाये. 3- विततम – दौनों हाथों की हथेलियाँ परस्पर सामने करें. 4- विस्त्रतम – दौनों हाथों की अंगुलियाँ खोलकर दोनों को कुछ अधिक अलग करें. 5 – द्विमुखम – दौनों हाथों की कनिष्ठका से कनिष्ठका… Read More »Jap karne ka sahi tarika

vrat food

व्रत करने वाले व्यक्ति को क्रोध, लोभ, मोह, आलस्य, चोरी, इर्ष्या आदि नहीं करना चाहिए । व्रती को क्षमा, दया, दान, शौच, इन्द्रिय निग्रह देव पूजा, अग्नि होत्र और संतोष से काम करना उचित और आवश्यक है । व्रत के समय बार-बार जल पीने, दिन में सोने, तम्बाकू चवाने और स्त्री सहवास करने से व्रत बिगड़ जाता है । जल,… Read More »vrat food