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Budhwar vrat katha

Budhvar Vrat

।। बुधवार व्रत करने की विधि ।। गृह शांति तथा सर्व-सुखों की इच्छा करने वालो को बुधवार का व्रत करना चाहिए । इस व्रत में दिन-रात में एक ही बार भोजन करना चाहिए । इस व्रत के समय हरि वस्तुओं का उपयोग करना श्रेष्ठ है । व्रत के अंत में शंकर जी की पूजा, धूप, बेल-पात्र आदि से करनी चाहिए… Read More »Budhvar Vrat

Brahspatiwar vrat

Brahaspativar Vrat

।। वृहस्पतिवार व्रत करने की विधि ।। इस दिन भगवान् विष्णु जी की पूजा होती है । दिन में एक समय ही भोजन करते हैं । पीले वस्त्र धारण करें, पीले फलों का प्रयोग करें । भोजन भी चने की दाल, पीले कपडे तथा पीले चन्दन से पूजा करनी चाहिए । पूजन के पश्चात् कथा सुननी चाहिए । इस वृत्त… Read More »Brahaspativar Vrat

Bhagya rekha

Bhagya Rekha

भाग्य रेखा के केंद्र में क्रास का चिन्ह हो तो जातक के जीवन में कोई बड़ा परिवर्तन आता है जो उसके लिए अच्छा साबित नहीं होता । अगर भाग्य रेखा को शनि पर्वत पर कुछ छोटी-छोटी आदि रेखाएं सिदिनुमा होकर काटें तो जातक के जीवन में एक के बिच एक करके कई उतर चढाव आटे हैं जो अवनति के घोतक… Read More »Bhagya Rekha

Mercury House

Budh Rekha

“बुध पर्वत” व् “बुध रेखा” चतुर्थ पर्वत बुध पर्वत से सम्बन्ध रखता है और उसकी पहिचान बुध पर्वत और बुध की अंगुली से होती है. ऐसे जातक के गुण एवं उसकी विशेषताएं सदैव स्पस्ट होती हैं और वह एक मुंह वक्ता, बैज्ञानिक, चिकित्सक या वकील बनता है और व्यापर-व्यवसाय में भी उसे बढ़ी सफलता मिलती है. जल्दी ही बेईमानी का… Read More »Budh Rekha

Gajkeshri yog

Gaj kesri yog

गजकेशरी योग : चंद्रमा से केंद्र में ( 1, 4, 7, 10 वें भाव में ) ब्रहस्पति स्थित हो तो गजकेशरी योग होता है. यदि शुक्र या बी उध नीच राशि में स्थित न होकर या अस्त न होकर चंद्रमा को सम्पूर्ण द्रष्टि से देखते हों तो प्रवाल गज केशरी योग होता है. फल : इस योग में जन्म लेने… Read More »Gaj kesri yog

Nature of Planets

Nature of planets

सूर्य के साथ शनि हो तो बल बढ़ता है. शनि के साथ मंगल हो तो मंगल अधिक बलशाली हो जाता है. मंगल के साथ गुरु, गुरु के साथ चंद्र, चंद्र के साथ शुक्र, शुक्र के साथ बुध तथा बुध के साथ चंद्र के होने पर उनका बल बढ़ता है. यही है नेचर ऑफ़ प्लैनेट्स. 1- सूर्य – सूर्य से पिता,… Read More »Nature of planets

Navratna

रत्न : सामान्य परिचय प्राचीन शास्त्रों के अनुसार रत्नों और उपरत्नों की कुल संख्या चौरासी मणि गई है, किन्तु इनके अतिरिक्त भी कुछ अन्य उपरत्न होते हैं, जिन्हें बाद में उप्रत्नों की श्रेणी में रखा गया है. इन उप्रत्नों में कुछ ऐसे उपरत्न भी हैं, जो प्रायः अप्राप्य या दुर्लभ हैं, साथ ही इनमें ऐसे उपरत्न भी शामिल हैं जो… Read More »Navratna

Rudraksh use

क्या आप जानते हैं ? किस व्यवसाय अथवा पेशे में कौन-सा रुद्राक्ष लाभकारी है…. ? प्रशासनिक अधिकारी – ————————————————- १३ मुखी तथा १ मुखी कोषाध्यक्ष ————————————————————— 8 मुखी तथा १२ मुखी जज – न्यायाधीश ——————————————————— १४ मुखी तथा २ मुखी पुलिस तथा मिलट्री सेवा ————————————————— 9 मुखी तथा ४ मुखी बैंकिंग सेवा ————————————————————— 11 मुखी तथा 4 मुखी डाक्टर –… Read More »Rudraksh use

Temple direction in home

Temple ईशान एक विदिशा है अर्थात दो दिशाओं ( उत्तर- पूर्व ) से निर्मित कोण है । यह चरों कोनों में सर्वाधिक पवित्र है; अतेव इसे आराधना, साधना, विद्यार्जन, लेखन एवं साहित्यिक गतिविधियों हेतु शुभ माना गया है । यह कोण मनुष्य को बुद्धि, ज्ञान, विवेक, धैर्य तथा साहस प्रदान करके सभी कष्टों से मुक्ति दिलाता है । इतने पूजनीय कोण… Read More »Temple direction in home

Daan ke prakar

।। Daan ke prakar ।। आमतौर पर सभी धर्मों में दान देने की प्रथा वर्षों से चली आई है । गृह मनुष्य के जीवन पर शुभ-अशुभ प्रभाव डालते हैं, यह बात विवाद के परे है । ग्रहों को अनुकूल करने के लिए स्नान, पूजा, जाप और दान ये चार मुख्य उपाय हैं । लाल किताब का सम्पूर्ण आधार उपाय और… Read More »Daan ke prakar