Home » Blog

Blog

Bhagya sambndhi prashnottar

“Bhagya sambandhi prashnottar in hindi”

प्रश्न 1 – सौभाग्यशाली होने का योग है या नहीं ? उत्तर – (क) आयुरेखा से रविरेखा उत्पन्न होने पर व्यक्ति सौभाग्यशाली होता है. हाथ के पर्वत भी यदि उच्च हो. (ख) मणिबंध से भाग्यरेखा निकल कर माध्यम अंगुले के दुसरे पर्वत तक जाती है तो व्यक्ति सौभाग्यशाली होता हगे. प्रश्न 2 – दैवदुर्विपाक ( दुर्भाग्य ) तो नहीं है… Read More »“Bhagya sambandhi prashnottar in hindi”

jivan sambandhi prashnottar

“Jivan sambandhi prashn uttar hindi mein”

प्रश्न 1 – शारीरिक और मानसिक शांति रहेगी या नहीं ? उत्तर – यदि करतल तमाम रेखाओं से भरा हुआ होता है तो ऐसे व्यक्ति को प्रायः शारीरिक और मानसिक अशांति रहती है. यह लक्षण न होने पर शारीरिक और मानसिक शांति रहती है. प्रश्न 2 -क्या शारीरिक पीड़ा रहेगी ही ? उत्तर – यदि व्यक्ति के हाथ में आयुरेखा… Read More »“Jivan sambandhi prashn uttar hindi mein”

chakr vichar

Chakra Vichar

चक्र विचार तथा फल  एक चक्र वाचाल बखाने, दुई चक्र गुडगान बहु जाने. तीन चक्र वाणिज्य धन जावे, चारि चक्र सौं दरिद्र जन जावे. पाँच चक्र सर्वांग विलासा छठा चक्र रस-काम दुलासा.  सात चक्र बहु सुख को साजा आठ चक्र रोगी कंजा.  एक चक्र – जिस जातक के दौनों हाथ की अँगुलियों में, एक चक्र हो तो जातक तीव्र बुद्धि… Read More »Chakra Vichar

Ganesh chaturthi 2021

“Ganesh chaturthi 2021 date”

गणेश चतुर्थी हिन्दुओं का एक पवित्र त्यौहार है. इस त्यौहार को सम्पूर्ण भारत वर्ष में मनाया जाता है. गणेश चतुर्थी का त्यौहार भारत वर्ष का बहुत बड़ा त्यौहार है, इस त्यौहार को भारत में हर घर में मनाया जाता है. पूजन में सभी देवी-देवताओं में सर्वप्रथम गणेश जी की पूजा की जाती है. गणेश चतुर्थी कब है?गणेश चतुर्थी, जिसे ‘विनायक… Read More »“Ganesh chaturthi 2021 date”

Grah vichar

Grah Vichar

जब कोई गृह अशुभ होता है तब उसके फल के संकेत तथा लक्ष्ण जातक के जीवन में पाए जाते हैं. इन लक्षणों के अध्ययन से फ़िलहाल कौन गृह अशुभ फल दे रहा है, इसकी जानकारी प्राप्त होती है. ऐसे अशुभ गृह के कुप्रभाव से बचने के लिए कौन-सा उपाय कारगर हो सकता है, इसकी जानकारी यहाँ दी जा रही है. … Read More »Grah Vichar

Hastrekha gyan

Hast Rekha Gyan

इस अखिल ब्रह्माण्ड के चराचर प्राणियों में उस सर्वशक्तिमान पर्मेश्वर्र की सत्ता  व्यापक है – कोई वस्त – अणु के अणु से लेकर सौरमंडल के विशिष्ट- से – विशिष्ट तेजपिंड तक – ईएसआई नहीं जिसमें भगवत सत्ता न हो परन्तु महर्षि कठ ने अपने उपयुक्त वचनों में कहा है कि वह गूढ़आत्मा  सब में सामान रूप से प्रकाशित नहीं होता. उस सच्चिदानन्द की सत्ता, चेतना और आनन्द – कला सब में व्याप्त है – परन्तु प्रकाशित सामान रूप से नहीं है. प्रस्तर में उतनी ‘चेतना नहीं है जितनी व्रक्षों में और वृक्षों की अपेक्षा मनुष्य में अधिक चेतनाहै. चेतना की शास्त्रीय परिभाषा न कर सर्वबुद्धिगम्य यह परिभाषा सुगम होगी कि जितना ‘ क्रियात्मक’ व्यापक-मन या इन्द्रियों का – इस चराचर जगत में देखा जाता है – वह ‘प्राण-शक्ति’ पर आधारित होता है और उस प्राण-शक्ति का आधार ‘चेतना’ है. महर्षि चरक ने कहा है-  ‘सेन्द्रियं चेतंद्र्व्यं निरिन्द्रियमचेतनम ‘  अर्थात जिन पदार्थों में इन्द्रियां कार्य करती हैं वे चेतन है जिनमें इन्द्रियां कार्य नहीं करती वे अचेतन है. इस व्यावहारिक परिभाषा के अनुसार प्रस्तरदी निरिन्द्रिय होने से ‘अचेतन’ हुए. परन्तु वास्तव में गंभीर द्रष्टि से देखा जय तो जो मनुष्य में जितनी क्रिया है उतनी वृक्षों में नहीं -फिर भी वृक्ष बढ़ते है, उनमें कोमल अंकुर पैदा होते है, पुष्प खिलते है, फल उत्पन्न होते है, वृक्ष बड़े होते है, पुराने होते हैं और सुखकर मर जाते है.   ‘अतः संज्ञा भवन्त्येते सुख दुःख समन्विताः।’ (मनुस्म्र्ती )  प्रतिक्षण में उनमें कुछ-न-कुछ किरिया होती रहती है. उसी प्रकार भूगर्भ-विज्ञान वेत्ता हमें बताते है की यह पत्थर दस हजार वर्ष पुराना है, यह एक लाख वर्ष पुराना और यह दस लाख वर्ष पुराना.   इस द्रष्टिकोण से भी नवांश के प्रतीक ‘पनियुग्ल’ का विशेष महत्त्व है. जैसे केवल नाडी को देखने से अनुभवी बैध को सम्पूर्ण शारीर के कुपित दोषों का ( वाट, पिट, काफ के विकारों का ) ज्ञान हो जाता है; जैसे केवल हथेली की गर्मी या पीलापन ज्वर या पीलिया रोग प्रकट कर देता है, उसी प्रकार हाथ का आकर, उँगलियों के आकर, अंगुष्ठ आदि मनुष्य की पित्तवृत्ति बोद्धिक शक्ति और प्रवृत्ति का परिचय दे देते हैं. यह तर्कसम्मत सिद्धांत है, की प्रत्येक कार्य के मूल में ‘कारण’ अवश्य होता है. यदि मनुष्यों के हाथों के आकर भिन्नभिन्न हैं तो ‘कारण’ में भिन्नता नहीं? मस्तिष्क के विभिन्न भाग शारीर के विभिन्न भाग शारीर के विभिन्न अवयवों का संचालन करते हैं.  मस्तिष्क का कौन-सा भाग किस अवयव का संचालन या अधिष्ठाता है या किस अंग से सम्बन्धित है यह निम्नलिखित तालिका से स्पष्ट होगा –  सर को घुमाना   नितम्ब प्रदेश  घुटने और टखने   पैर के अंगूठे   पैर की उंगलियाँ   कंधे   कुहनियाँ  हाथ की कलाई   हाथ की उंगलियाँ  तर्जनी  अंगुष्ठ   पलक   मुख की भीतरी भाग   मुख-ओष्ठ से वेष्टित भाग   चवना   नासिका का भीतरी भाग जहाँ कंठ के भीतरी भाग से योग होता है.  कंठ ( भीतरी भाग ) जहाँ से शब्द उच्चारित किया जाता है .  नेत्र प्रान्त ( नेत्रों को घुमाकर बगल से देखना )   सर और आँखों का युगवत संचालन .  मस्तिष्क के किस भाग का शारीर के किस अवयव से विशेष सम्बन्ध है यह बैज्ञानिक प्रयोगों से सिद्ध हो चूका है. मस्तिष्क के भाग-विशेष के चोट या अन्य कारण से अस्वस्थ हो जाने से, सम्बंधित शारीर का अवयव विशेष, काम करना बंद कर देता है. इन मस्तिष्क के विभिन्न भागों का सम्बन्ध विविध प्रकार की इच्छाओं, आकांक्षाओं तथा क्रियात्मक प्रव्रत्तियों से भी है. इसी कारण शारीर-लक्ष्ण से चेष्टाओं तथा मानसिक क्रियाओं का पता लगता है.   प्रायः जो भी कार्य हाथ करते है उनका स्सर्वप्र्थम अंकुर इच्छा-शक्ति या मस्तिष्क में होता है. भगवन मनु ने कहा है-  ‘अकामस्य क्रिया काचिद द्र्श्यते नेह कहिचित ।  यघद्धि कुरुते किंचित तत तत कामस्य चेश्तितम ।।’  इसलिए भिन्न-भिन्न इच्छा वाले व्यक्ति, एक-सी परिस्थिति में रहते हुए भी भिन्न-भिन्न कार्यों की इच्छा करते हैं और उनमें संलग्न होते हैं. संलग्न होने पर, अपनी-अपनी शक्ति और गुण-दोष के अनुसार सफल, विफल या आंशिक सफल होते हैं.   हमारे शास्त्रकारों ने हाथ को विविध भागों में विभाजित किया है –  1- ब्रह्मतीर्थ 2- पित्रतीर्थ 3- पित्रस्थान 4- मत्रस्थान 5- भ्रात्रस्थान 6- बन्धुस्थान 7- विद्या स्थान , सुतस्थान 8- करभ 9- करतल मूल 10- करतल-मध्य अँगुलियों के… Read More »Hast Rekha Gyan

Ekadasi vrat katha

Ekadashi Vrat

।। एकादशी व्रत ।। ।। चैत्र शुक्ता कामदा एकादशी ।। चैत्र मॉस की शुक्ल पक्ष की एकादशी को कामदा एकादशी कहते हैं । कथा : – प्राचीन समय में पुंडरिक नामक एक राजा नागलोक में राज्य करता था । उसका दरबार किन्नरों व् गन्धर्वों से भरा रहता था । एक दिन गंधर्व ललित दरवार में गाना कर रहा था की… Read More »Ekadashi Vrat

Dreams

Dream

अ, आ 

अंक देखना – शुभ एवं विजय का प्रतीक ,

अंकों से बनी संख्या देखना – भाग्य विधायक प्रतीक ,

आँगन देखना (अपने घर का ) – अशुभ सूचक ,

आँगन ( दुसरे के घर का ) – शुभ सूचक,

अंगभंग देखना ( स्वयं का ) – शीघ्र ही अनुकूल एवं शुभ समाचार प्राप्ति ,

अंगभंग देखना ( दूसरों का ) – दुर्घटना का सूचक ,

अंगूठी देखना – शीघ्र ही सगाई या शादी ,

अंधकूप देखना – अधिक घटा, पराजय या परेशानी ,

अँधा देखना -कष्टप्रद स्थिति ,

अँधा देखना ( स्वयं को ) – विशेष शुभ ,

अनाथालय देखना -स्थानान्तरण, आर्थिक हनी या धोखा ,

अन्न देखना – शीघ्र ही शुभ समाचार मिलना ,

अपमान देखना – मुकद्दमे में विजय, पुराणी अदावत मिटे ,

अष्टभुज देखना ( दुर्गा माता देखना ) – शीघ्र ही भोगोलिक क्र्त्यसम्पन्न ,

अस्त्र-शस्त्र देखना – परेशानी दूर होगी ,

आश्रम देखना – जीवन में स्थिरता का संकेत ,

अनजान औरत से प्रेम करना देखना – विवाह होगा ,

अनजान औरत को दूर जाते देखना – आशाएं पूर्ण होंगी ,

अविवाहित लड़की को घर पर देखना – विवाह का सूचक ,

अनजान औरत के साथ मैथुन करते देखना – रोग का सूचक ,

अनजान लड़की का चुम्बन लेना देखना – धनि होने का सूचक ,

अनजान औरत से प्रेम लेना – गरीबी का लक्षण , कर्ज ,

अनजान औरत के हाथ देखना ( एक हाथ केवल ) – शांति ,

अनजान औरत के हाथ देखना – ( अनेक हाथ ) – अशांति ,

अनजान पुरुष के साथ युद्ध देखना – झगड़ा, विवाद ,

अदालत देखना – शुभ , सम्रद्धि ,

अग्नि देखना – अशुभ , म्र्त्युदायक कष्ट ,

अग्नि देखन ( स्वयं का घर जलना ) – रोग वृद्धि अथवा ऋण वृद्धि ,

अग्निशाला या पकता भोजन देखन – रोग मुक्ति अथवा ऋण मुक्ति ,

अजगर देखना – विवाह

अजगर मारना देखना – शत्रु पर विजय चिंता-मुक्ति

अन्धलोक देखना – विपत्ति में पड़ने का सूचक ,

अंगुली देखना ( फांक-फांक ) – गरीबी का सूचक ,

अशोक वृक्ष – हठात शोक ,

अस्पष्ट देवी-देवता देखना – उन्नति की आशा ,

आघात या प्रचुर रक्त बहना – अधिक धन लाभ .

अंगूठी खरीदना – शांति,

अंगूठी पर मीणा करते देखना – संतान लाभ,

अंगूठी हाथ में लेकर देखना -मान-सम्मान में ब्रद्धि ,

आम देखना – सिद्धि लाभ ,

अनार देखन – साधन लाभ या उन्नति ,

आम देखना ( गिरा हुआ ) – सपूत सन्तान की प्राप्ति ,

आम का पेड़ देखना – विवाद

अंगूठी बेचना या टूटना – स्त्री कष्ट, अशांति,

आलू देखना – बदनामी,

आलू पेड़ में देखना – दुःख, कष्ट,

आशा पूर्ण होना – सम्मान में हनी ,

आशा अपूर्ण होना – प्राप्ति योग,

अमीर बनते देखना – लाभ,

आकाश बादलों से घिरा देखना रोजगार में ब्रद्धि,

आकाश काटना – वर्षा व् फसल में उन्नति ,

अपने मृत को जीवित देखना – दुःख ,

अपनी देह को ब्रहना देखना – मानसिक शांति,

अपनी देह को कीड़ों से भरे देखना – विख्यात होने का सूचक ,

अपनी म्रत्यु देखना – पीड़ा,

अपने को भूखा देखना – सन्तान हानि ,

अपने को पानी में डूबता देखना – मुकद्दमा होगा,

अपने मुहं में सूर्य की आभा देखना – प्रचुर धन प्राप्ति ,

अपने बाल कटे देखना -आर्थिक कष्ट ,

अपने बाल अपने ही आप काटना देखना – ऋण मुक्ति ,

अपना शारीर दो भागों में देखनापुत्र या दोस्त की प्राप्ति ,

Read More »Dream

Jeevan Rekha

Jeevan Rekha ( Life Line ) इस रेखा को आयु रेखा, पितृ रेखा गोत्र प्रगूढ रेखा भी कहते हैं, यह रेखा अंगूठे और तर्जनी के बीच से प्रारंभ होकर गोलाई बनती हुई, शुक्र क्षेत्र को घेरती हुई मणिबंध या उसके समीप तक जाती है । अगर जीवन रेखा सुन्दर, पुष्ट और गोलाई लिए  हो तो जातक स्वस्थ दीर्घायु, एश्वर्य युक्त… Read More »Jeevan Rekha

chandra grah

Chandr Grah Vichar

” चन्द्र पर्वत ” ” चन्द्र विचार “ छठा पर्वत चंद्रमा का माना जाता है. यह नाम इसलिए  दिया गया है, क्योकि हाथ के जिस भाग से उसकी पहिचान होती है, क्योंकि हाथ के जिस भाग से उसकी पहचान होती है, उस भाग को चन्द्र पर्वत कहा जाता है. अलग-अलग या संयुक्त चिन्ह, नक्षत्र, त्रिकोण, व्रत, एक मात्र उठती हुई… Read More »Chandr Grah Vichar