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“Bhagya sambandhi prashnottar in hindi”

Bhagya sambndhi prashnottar

प्रश्न 1 – सौभाग्यशाली होने का योग है या नहीं ?

उत्तर – (क) आयुरेखा से रविरेखा उत्पन्न होने पर व्यक्ति सौभाग्यशाली होता है. हाथ के पर्वत भी यदि उच्च हो.

(ख) मणिबंध से भाग्यरेखा निकल कर माध्यम अंगुले के दुसरे पर्वत तक जाती है तो व्यक्ति सौभाग्यशाली होता हगे.

प्रश्न 2 – दैवदुर्विपाक ( दुर्भाग्य ) तो नहीं है ?

उत्तर – (क) करतल में टेढ़ी किन्तु जंजीर की तरह भाग्यरेखा होने पर व्यक्ति को दैवदुर्विपाक (दुर्भाग्य) होता है. बिच हथेली में क्रास भी हो.

नोट – दुर्भाग्य होने से व्यक्ति के प्रायः सभी उद्योग निष्फल हो जाते है.

(ख) आयुरेखा, शिरोरेखा और ह्र्दयरेखा, इन तीनों रेखाओं का एक जगह मिल्न होना दुर्भाग्य का पूर्ण परिचायक है और यह योग इतना अशुभ है की, व्यक्ति की अचानक म्रत्यु भी हो सकती है.

प्रश्न 3 -मान और गौरव प्राप्त होगा या नहीं ?

उत्तर ब्रहस्पति के क्षेत्र में व्र्त्तचिंह रहने से व्यक्ति को मान और गौरव की प्राप्ति होती है. ब्रहस्पति का पर्व्कात भी यदि उच्चा हो.

प्रश्न 4 – ब्रद्धावस्था में भी धन और मान मिलेगा या नहीं ?

उत्तर – अयुर्वर्धनी के ऊपर त्रुभुज चिन्ह रहने से व्यक्ति को ब्रद्धावस्था में धन और यश मिलता है.

प्रश्न 5 – ब्रद्धावस्था (बुढ़ापे) में दुर्दशा या दुर्गति तो नहीं होगी ?

उत्तर – दोनों ही हाथों की भाग्यरेखा का शेष अंश लहर की तरह टेढ़ा होने से बुढ़ापे में दुर्दशा और दुर्गति (दरिद्रता) होती है.

प्रश्न 6 – जीवन में आर्थिक (धन सम्बन्धी) कष्ट तो नहीं है ?

उत्तर – (क) करतल में भाग्यरेखा जंजीर की तरह हो.

(ख) आयुबर्धनी रेखा साफ़ न हो तथा टूटी हो.

प्रश्न 7 – सौभाग्य है या नहीं ?

उत्तर – (क) तर्जनी अंगुली के पाहिले पर्व में क्रास चिन्ह होने से सौभाग्य होता है.

(ख) अनामिका अंगुली के तीनों पर्वों में एक सीधी रेखा जाने से सौभाग्य होता है.

(ग) बुध के क्षेत्र में एक लम्बी खड़ी रेखा रहने से सौभाग्य होता है.

प्रश्न 8 – दुर्भाग्य तो नहीं है?

(क) करतल में गड्डा-सा प्रतीत होना दुर्भाग्य का परिचायक है.

नोट – जिस व्यक्ति के हाथ में जैसा भी कम-ज्यादा के हिसाब से गड्डा होता है, उसी के हिसाब से उसके लिए दुर्भाग्य भी होता है.

(ख) अनामिका अंगुली के तीसरे पर्व में अर्धमण्डल चिन्ह होने से दुर्भाग्य और दरिद्रता होती है.

(ग) करतल में दो भाग्यरेखा रहने से व्यक्ति की अवन्ती और दुर्भाग्यता होती है.

प्रश्न 9 – जीवन में उन्नति है या नहीं ?

(क) शनि का क्षेत्र नीचा यानि उभरा हुआ न होने पर व्यक्ति उन्नति नहीं कर पाता अर्थात सामान्य भाव से जीवन व्यतीत करता है.

(ख) बुध के क्षेत्र में एक गहरी लम्बी शक्ल की खड़ी रेखा हो.

(ग) शनि के क्षेत्र में एक गहरी लम्बी शक्ल की खड़ी रेखा हो.

(घ) गुरु के क्षेत्र में एक गहरी लम्बी शक्ल की खड़ी रेखा हो.

नोट – गृह के क्षेत्र में कई खड़ी रेखायें होने से विपरीत फल होता है अर्थात वे सौभाग्य प्रदान न करके दुर्भाग्य लाती है.

(ड) ह्रदय रेखा की दो शाखाये हों.

(च) शिरोरेखा की दो शाखाये हों.

(छ) दोनों हाथों में रविरेखा सुस्पष्ट हो.

(ज) रवि के क्षेत्र में व्रत्ताचिंह हो.

(झ) गुरु के क्षेत्र में चतुष्कोण चिन्ह हो.

(ञ) आयु रेखा से उठकर उर्ध्वरेखा भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में जाती हो.

नोट – उपर्युक्त योगों में कोई-सा भी योग व्यक्ति के करतल में होने से उन्नति होती है. यदि करतल में अधिक योग होंगे तो शुभफल और भी अधिक होगा.

प्रश्न 10 – उन्नतिशील दीर्घजीवन है या नहीं ?

करतल में त्रिभुजाकार क्षेत्र सुस्पष्ट रहने पर व्यक्ति उन्नतिशील होने के साथ दीर्घजीवी भी होता है.

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