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Goodluckastro123

Gajkeshri yog

Gaj kesri yog

गजकेशरी योग : चंद्रमा से केंद्र में ( 1, 4, 7, 10 वें भाव में ) ब्रहस्पति स्थित हो तो गजकेशरी योग होता है. यदि शुक्र या बी उध नीच राशि में स्थित न होकर या अस्त न होकर चंद्रमा को सम्पूर्ण द्रष्टि से देखते हों तो प्रवाल गज केशरी योग होता है. फल : इस योग में जन्म लेने… Read More »Gaj kesri yog

Nature of Planets

Nature of planets

सूर्य के साथ शनि हो तो बल बढ़ता है. शनि के साथ मंगल हो तो मंगल अधिक बलशाली हो जाता है. मंगल के साथ गुरु, गुरु के साथ चंद्र, चंद्र के साथ शुक्र, शुक्र के साथ बुध तथा बुध के साथ चंद्र के होने पर उनका बल बढ़ता है. यही है नेचर ऑफ़ प्लैनेट्स. 1- सूर्य – सूर्य से पिता,… Read More »Nature of planets

Navratna

रत्न : सामान्य परिचय प्राचीन शास्त्रों के अनुसार रत्नों और उपरत्नों की कुल संख्या चौरासी मणि गई है, किन्तु इनके अतिरिक्त भी कुछ अन्य उपरत्न होते हैं, जिन्हें बाद में उप्रत्नों की श्रेणी में रखा गया है. इन उप्रत्नों में कुछ ऐसे उपरत्न भी हैं, जो प्रायः अप्राप्य या दुर्लभ हैं, साथ ही इनमें ऐसे उपरत्न भी शामिल हैं जो… Read More »Navratna

Rudraksh use

क्या आप जानते हैं ? किस व्यवसाय अथवा पेशे में कौन-सा रुद्राक्ष लाभकारी है…. ? प्रशासनिक अधिकारी – ————————————————- १३ मुखी तथा १ मुखी कोषाध्यक्ष ————————————————————— 8 मुखी तथा १२ मुखी जज – न्यायाधीश ——————————————————— १४ मुखी तथा २ मुखी पुलिस तथा मिलट्री सेवा ————————————————— 9 मुखी तथा ४ मुखी बैंकिंग सेवा ————————————————————— 11 मुखी तथा 4 मुखी डाक्टर –… Read More »Rudraksh use

Temple direction in home

Temple ईशान एक विदिशा है अर्थात दो दिशाओं ( उत्तर- पूर्व ) से निर्मित कोण है । यह चरों कोनों में सर्वाधिक पवित्र है; अतेव इसे आराधना, साधना, विद्यार्जन, लेखन एवं साहित्यिक गतिविधियों हेतु शुभ माना गया है । यह कोण मनुष्य को बुद्धि, ज्ञान, विवेक, धैर्य तथा साहस प्रदान करके सभी कष्टों से मुक्ति दिलाता है । इतने पूजनीय कोण… Read More »Temple direction in home

Daan ke prakar

।। Daan ke prakar ।। आमतौर पर सभी धर्मों में दान देने की प्रथा वर्षों से चली आई है । गृह मनुष्य के जीवन पर शुभ-अशुभ प्रभाव डालते हैं, यह बात विवाद के परे है । ग्रहों को अनुकूल करने के लिए स्नान, पूजा, जाप और दान ये चार मुख्य उपाय हैं । लाल किताब का सम्पूर्ण आधार उपाय और… Read More »Daan ke prakar

Ichhanusar santan

।। इच्छानुसार सन्तान ।। ऋतु से चोथे दिन से लेकर सोलहवें दिन तब गर्भधारण का समय है । शंखवली और गोदुग्ध पान कर स्वामी के वाम पाशर्व में शयनं कर स्वामी से पुत्र की कामना प्रकट करनी चाहिए । सूर्यंनाडी और चन्द्रनाडी को एकत्र कर गर्भाधान करने से पुत्र उत्पन्न होता है । सूर्य चन्द्र का संयोग करके अर्थात रात्रि… Read More »Ichhanusar santan

Til ke nishan or shakun

।। तिल के निशान और शकुन ।। ज्योतिष अंग शकुन शास्त्र में मानव प्राणी के शारीर पर टिल के निशानों का भी शुभाशुभ वर्णन प्रस्त्तुत किया है, जो निम्न प्रकार है – माथे पर तिल का निशान :- यदि माथे पर बाँए तरफ टिल का निशान हो तो जीवन परेशानी दायक परन्तु दांये तरफ टिल के निशान से प्रसन्नता, सुख,… Read More »Til ke nishan or shakun

Angon ka fadkna

।। अंगों का फडकना और शकुन ।। शकुन विज्ञानं के अन्दर अंगों का फडकन बहुत बड़ा महत्त्व रखता है । यह विषय सुष्टि काल से ही इतना लोकप्रिय रहा है की घर में बड़े-बूढों से लेकर छोटे-छोटे बच्चे भी इस विषय पर वार्ता करते हैं । आमतौर पर आप इस वैज्ञानिक युग में भी यह कहते हुए सुनते होंगे की… Read More »Angon ka fadkna

Nakhun dekh kar jaane apna bhagya

हाथ के नाख़ून हाथ के नाखूनों से जातक के स्वभाव की सौभाग्य का पता चलता है । अँगुलियों का प्रभाव भाग जितना  लम्बा हो, उसकी आधी लम्बाई नाखूनों की होना उत्तम माना गे है । यह आगे की और कुछ बड़े, पीछे की और कुछ छोटे होने चाहिए । अगर यह निर्मल तथा ललाई लिए हुए है और इनकी उचाई… Read More »Nakhun dekh kar jaane apna bhagya