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Angon ka fadkna

।। अंगों का फडकना और शकुन ।।

शकुन विज्ञानं के अन्दर अंगों का फडकन बहुत बड़ा महत्त्व रखता है । यह विषय सुष्टि काल से ही इतना लोकप्रिय रहा है की घर में बड़े-बूढों से लेकर छोटे-छोटे बच्चे भी इस विषय पर वार्ता करते हैं । आमतौर पर आप इस वैज्ञानिक युग में भी यह कहते हुए सुनते होंगे की ” यार ” कई दिनों से मेरी बांयी आँख फाडक रही है पता नहीं क्या अशुभ होने वाला है ?

इस सन्दर्भ में पुरुष का दहीं अंग और स्त्री का बांया अंग फाडक करके अपनी फडकन के अनुसार शुभाशुभ फलों को व्यक्त करते हैं तो प्रस्तुत है विभिन्न अंगों के फडकने का व्योरा :-

सर :- सर का फडकना सफलता का सूचक है । यह क्रिया सर के पीछे भाग में हो तो मनोकामनाएं प्पुरी होती हैं ।

माथा :- अगर माथे का सम्पूर्ण हिस्सा फडके तो अत्यंत परिश्रम करना पड़ता है । यदि दाहिने तरफ फडकन हो तो यात्रा में विघ्न या दुःख प्राप्त होता है और बांयी तरफ की फडकन शुभता एवं प्रसंन्त्ता प्रदान करती है ।

गरदन :- गर्दन का फडकना प्रायः शुभ ही माना जाता है और यह फडकन रुप्व्त्ति नारी से भी संपर्क कराता है ।

कान :- यदि मनुष्य का बांया कान फडके तो मन खिन्न हो जाए और दाहिना कान फडकने से प्रमोशन प्राप्त होता है ।

भोंवे :-यदि भोंगें फडके तो समझ लीजिए किसी से प्यार होने वाला है ।

आँख :- बांयी आँख का फडकना अशुभता की निशानी और दांयी आँख फडकना लाभ और शुभता का सूचक माना गया है ।

पलक :- दाहिनी पलक प्रसन्नता प्रदान करें और बांयी पलक के फडकने से घोर विपत्ति से टकराव कराता है ।

गाल :- दाहिना गाल फडकने से लाभ और बांये गाल की फडकन से व्यर्थ व्यय कराता है, परन्तु गर्भवती स्त्री के गाल मध्य में फडकने से कन्या रत्न की प्राप्ति होती है ।

नाक :- नाक का फडकना शुभता का सूचक है ।

मुख :- हर परिस्थिति में मुख का फडकना लाभदायक सिद्ध होता है ।

जीभ :- जीभ फडकने से बेवजह का क्लेश पैदा होत्ता है ।

होंठ :- होंठ का फडकना शुभता का प्रतीक है ।

थोड़ी :- थोड़ी का फडकना प्रसन्नता का परिचायक और शुभता का सूचना प्रदान करती है ।

कन्धे :- बांया कन्धा फडकने से उलझन, परेशानी, बांया कन्धा फडकने से शत्रु हावी और दोनों कन्धा फडकने से विवाद पैदा होता है ।

बगल :- दाहिनी बगल फडकने से सुख-संपत्ति लाभ और बांयी बगल फडकने से दोनों की हनी होती है ।

बाँह :- दाहिनी बाँह के फडकने से प्रसन्नता एवं शुभता दे और बांयी बाँह की फडकन से चिंता की उत्पत्ति करता है ।

हाथ :- दांया हाथ फडकने से मान-प्रतिष्ठा की प्राप्ति और बाँए हाथ की फडकन से विरह-वेदना प्रदान कराती है ।

हथेली :- बांयी हथेली फडकने से हानि परन्तु दायी हथेली फडकने से लालच प्रदान कर लाभ दिलाती है ।

पीठ :- पीठ का फडकना प्रायः परेशानी व् अशुभता की निशानी है ।

कमर :- कमर यदि दाहिनी तरफ फाडके तो अशुभ एवं दाहिनी तरफ फडके तो शुभ फल देता है ।

पेट :- पेट का फडकना प्रायः परेशानी व् अशुभता की निशानी है ।

छाती :- छाती का मध्य भाग फडकने से ल;आभ, बाकी भाग फडकने से हानि होती है ।

नाभि :- नाभि का फडकना सर्व नाशक का संकेत है ।

गुप्तांग :- गुप्तांग का फडकना सर्वनाश का संकेत है ।

पाँव की ऊँगली :- दाहिने पैर की प्रथम और अंतिम अंगुली फडकने से अशुभ परन्तु बाँए पैर की यही अंगुली फडके तो हर तरफ से लाभ होता है ।

पगध्वनि :- किसी-किसी आदमी को चलने पर पाँव से धप्प-धप्प की आवाज होती है तो संसार हीन एवं अशुभता की निशानी है ।

दांत :- ऊपर भाग दांत फडकने से प्रसन्नता और निचे का दांत फडकने से दुःख मिलता है ।

पिंडली :- पिंडली फाड़ना शत्रु-उत्पन्न करने का परिचायक है ।

हाथ का अंगूठा :- दाहिना अंगूठा फडकने से शुभ समाचार मिले और बांया फडकने से हानि प्राप्त होती है ।

घुटना :- बाँए घुटने की फडकन शुभ और दाहिने का फडकना अशुभता प्रदान करने वाला होता है ।

ताकना :- इसका बांया अंग ही फडकन शुभ माना जाता है ।

पाँव :- दाहिना पाँव फडकने से विपत्ति का नाश और बांया फडके तो सफल यात्रा प्रदान कराता है ।

नितम्ब :- इसका फडकना हर हालत में शुभ माना गया है ।

जांघ :- दायाँ जांघ फडके तो शत्रु को बेचैन करे और बांया जांघ फडकने से सफलता मिलती है ।

ह्रदय :- ह्रदय का फडकना सदैव अशुभ होता है ।

 

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