Home » Blog » 9 planets नवग्रह

9 planets नवग्रह

grah

9 planetsग्रहों के आधार पर दिन, खान-पान, रहन-सहन इत्यादि :-

उत्तर भारत में नए वस्त्र या ज्जवाह्रत धारण करने के लिए बुधवार, शनिवार, शुक्रवार के दिन अच्छे माने जाते हैं । बुध-शनि शुक्र के मित्र हैं ।  इसी तरह अन्य कार्यों के लिए दिन नियत हैं ।

चन्द्र-दिन-सोमवार :

यदि जातक का चन्द्र निर्वल हो तो सोमवार के दिन दूध-चावल की खीर का भोजन करें । खीर में चाँदी का वरक डालें । इसी तरह एनी कार्यों के लिए दिन नियत है ।

मंगल-दिन-मंगलवार :

मंगल नीच का हो, शत्रु क्षेत्र का हो या अशुभ हो तो एसा जातक मसूर की दाल एवं एनी मंगल क वस्तुओं का उपयोग खुद के लिए न करे । रेवड़ियाँ बहते पानी में प्रवाहित करे । मीठी रोटी बनाकर बालकों को बांटें और बंदरों को खिलाये । हनुमानजी के मंदिर में जाकर दर्शन करें ।

मंगल उच्छ का हो तो मिष्ठान – लड्डू आदि बनाकर हनुमानजी के मंदिर में चढ़कर बांटें और स्वयं भी प्रसाद सेवन करें । लाल रुमाल अपनी जेब में रखें । मसूर की दाल का भोजन प्रयोग करें ।

बुध-दिन-बुधवार :

बुध नीच का हो, दुर्बल हो, तो एसा जातक हरे कपडे न पहिने । घर की छत पर या छज्जे पर प्त्तेवाले पौधे न रखें, आटा पिसने की चक्की का पाट, बांस की टोकरी या बॉस की एनी कोई वास्तु न रखे । नाक छिदवा ले और बुधवार की सवेरे ये मुंग जानवरों को खिलाये । वृहस्पति के 2, 9, 11, 12 घर में तथा मंगल के तीसरे, आठवें घर में बुध ख़राब एवं नीच प्रभाव डालता है । वृहस्पति और मंगल का शत्रु बुध है ।

ब्रहस्पति-दिन-वृहस्पतिवार :

वृहस्पति को उच्च एवं अनुकूल बनाने के लिए ब्रहस्पतिवार के दिन ब्राह्मण को पीले वस्त्र दान करें । कढ़ी और चावल खाएं और खिलाएं । चने की दाल और साबुत हल्दी की 4 गांठें पानी में प्रवाहित करें । अपने पास पीले रंग का रुमाल रखें । हल्दी या केसर का त्तिलक लगाएं । वृहस्पतिवार को किसी भी हालत में साबुत मुंग नहीं खाने चाहिए । इसके पीछे तर्क यह है की मुंग यानी बुध मिलने से वृहस्पति का प्रभाव नष्ट हो जाता है । जैसा पारा ( बुध ) सोना ( वृहस्पति ) में मिले तो सोना मिटटी हो जाता है । आमतौर पर नीच प्रभाव गोचर में या जन्म कुण्डली में ब्रहस्पति पर बुध की द्रष्टि हो तब होता है ।

शुक्र-दिन-शुक्रवार :

नीच शुक्र का जातक काली गाय की सेवा करे । दही एवं लाल ज्वार मंदिर में दान करे । सफ़ेद वस्त्र का दान करे । पत्नी के वजन जितना या उसका दसवां हिस्सा लाल ज्वार मंदिर में या धर्मस्थल में दान स्वरूप दे ।

शुक्र को उच्च करने के लिए बादाम जैसी शनि की वास्तु डालकर पौष्टिक पदार्थों का सेवन करे । आलू उबलकर जब पीले हो जाएँ, तब काली गाय को खिलाएं ।

शनि-दिन-शनिवार :

शनि जब नीच या दुर्वल हो तो शराब और मांसाहार का सेवन न करे । उस दिन उड़द, तेल, लोहा, काला वस्त्र आदि का दान करें । तेल या शराब बहते पानी में प्रवाहित करें । तेल में भुजिया बनाकर शनिवार को कौओं को खिलाएं ।

सूर्य-दिन-रविवार :

सूर्य को उच्च और अनुकूल करने के लिए चावल और गुड बहते पानी में प्रवाहित करे । रविवार को दूध भात में गुड मिलाकर खुद सेवन करें । गेहूं के आटे के चुर्में ( चावल ) के लड्डू बनाकर बच्चों को बांटें और स्वयं भी खाएं । तांबे का सिक्का बहते पानी में बहाए । तांबें का सिक्का गले में धारण करने से सूर्य अनुकूल फल देता है । लाल कपडे में गेहूं, गुड या सोना बांधकर दान करने पर भी सूर्य उच्च फलप्रद बनता है ।

रहू-दिन-रविवार :

जिनकी कुंडली में रहू नीच का या प्रतिकूल हो ऐसे जातक भूरे या काले रंग के कपडे नहीं पहने । नीली, काली टोपी, पगड़ी या फेटा ( साफ़ ) नहीं पहने । नीली, काली टोपी, पगड़ी या फेटा ( साफा ) नहीं पहिने । जेब में चाँदी का चोरस टुकड़ा हमेशा रहें । नारियल, बादाम, शीशी, घास, राइ ये रहू की चीजें पानी में प्रवाहित करें । भोजन की चीजों की नजर उतारे । रुचिकर भोजन की करें ।

केतु-दिन-ब्रहस्पतिवार :

जिस जातक की जन्मकुंडली में केतु अनिष्ट या नीच का हो, वह जातक शारीर पर सोना धारण करें । सोने का वरक  लगी मिठाई खाएं । केसर का सेवन करें । काला या सफ़ेद कुत्ता पालें । पीले वस्त्र में बांधकर केले, गेहूं, सोना तथा गुड दान करें । पीले चन्दन का तिलक नित्य लगाएं । टिल और सफ़ेद या काला कंबल दान दें । इससे केतु का दुष्प्रभाव रुकेगा । ब्रहस्पतिवार के दिन सवेरे सूर्योदय से लेकर एक घंटे के भीतर केतु का उपाय करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती होगी ।

Leave a Reply