शकुन-अपशकुन व तिल के फायदे व नुकशान

ज्योतिष अंग शकुन शास्त्र में मानव प्राणी के शारीर पर टिल के निशानों का भी शुभाशुभ वर्णन प्रस्त्तुत किया है, जो निम्न प्रकार है –

कुछ शकुन और अपशकुन उदाहरण:

  1. शकुन: कबूतर का देखना शुभ माना जाता है, जिसका मतलब होता है कि आने वाले दिनों में शांति और सुख स्थापित हो सकता है।
  2. अपशकुन: कौआ के काव्य करने का देखना अपशकुन माना जाता है, जिससे भविष्य में आने वाली मुसीबतों की संभावना हो सकती है।

माथे पर तिल का निशान :- यदि माथे पर बाँए तरफ टिल का निशान हो तो जीवन परेशानी दायक परन्तु दांये तरफ टिल के निशान से प्रसन्नता, सुख, सम्रद्धि एवं धन प्राप्ति करता है ।

ठुड्डी पर तिल का निशान :- यहाँ तिल से स्त्री सुख में बाधा और पत्नी प्रेम-भाव में विघ्न उत्पन्न करता है ।

छाती पर टिल :- जिस व्यक्ति की छाती पर तिल हो तो सिर्फ दाहिने तरफ होने से शुभ बांयी तरफ शुभता प्रदान करता है । परन्तु इसी स्थान का टिल स्त्री के लिए अत्यंत ही लाभप्रद है ।

भोहों पर तिल :- यदि भोंहों  पर तिल का निशान हो तो वह व्यक्ति सदैव यात्रा करने में ही जीवन गुजारता है ।

नाक पर तिल :- नाक पर यदि तिल का निशान हो तो वह व्यक्ति दुष्ट प्रक्रति का होता है और सदैव क्लेश करने में ही व्यस्त रहता है ।

गाल पर तिल :- यदि दाहिने तरफ हो तो शुभ परन्तु बाए तरफ अशुभता की निशानी है  ।

भुजा अर्थात बाहों पर टिल :- भुजा तिल अत्यंत ही सफलता दायक होता है । यदि दाहिने तरफ हो तो लक्स्ष्मीवान परन्तु बाँए तरफ का तिल धन के साथ पुत्र भी प्राप्त कराता है ।

होटों पर तिल :- इस स्थान के टिल ने व्यक्ति को अत्यंत लोभी और एय्याश बाज बनाकर रख देता है ।

कंठ पर टिल :- कंठ पर तिल के निशान बाले व्यक्ति भाग्यशाली हुआ करते है क्योंकि ये टिल भक्ति मार्ग पर ले जाकर खड़ा करने वाला होता है ।

कानों पर तिल :- इस स्थान के तिल ने सम्पूर्ण मनोकामनाओं को पूर्ण कराकर रख देता है ।

गर्दन पर तिल :- यहाँ का टिल आलसी होने का सूचक है ।

ह्रदय का तिल :- यहाँ का तिल व्यक्ति के भाग्य को चमका कर रख देता है ।

करतल अर्थात हथेली का तिल :- मानव के दोनों हथेलियेओन का तिल निशान द्रव्य प्राप्त  की सुचना देती है ।

कमर का तिल :- भविष्य का टिल में दुखदायक होता है अर्थात जवानी से लेकर बुढ़ापे तक ।

लिंग का तिल :- यहाँ के तिल के निशान से व्यक्ति को स्त्री का रसिया बना देता है ।

पेट पर तिल :- यहाँ के तिल निशान ने सदैव सुस्वादु उत्तम भोजन की उपलब्धि करते रहते हैं ।

अंगुली पर तिल :- इस स्थान के टिल इन्सान को धनवान बनता है ।

माध्यम पर तिल :- यहाँ का टिल सुख-शांति व् सफलता प्रदान करता है । एवं धन की उपलब्धि कराता है ।

कनिष्टा पर तिल :- इस स्थान का तिल इन्सान को पुत्रवान एवं धनवान बनता है ।

हथेली के पीछे तिल :- इस स्थान का तिल लोगों को कंजूस बना कर रख देता है, परन्तु उसके पास धन जरुर होता है ।

तिल के फायदे:

  1. ऊर्जा स्त्रोत: तिल में प्रोटीन, आयरन, और विटामिन B के प्राचुर मात्रा होते हैं, जो ऊर्जा के स्त्रोत के रूप में काम करते हैं।
  2. हड्डियों के लिए फायदेमंद: तिल में कैल्शियम और मैग्नीसियम होता है, जो हड्डियों के स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करते हैं।
  3. हृदय स्वास्थ्य: तिल में पॉलीअनसैचराइड्स होते हैं, जो हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।
  4. आंतरिक पाचन को बेहतर बनाने में सहायक: तिल में फाइबर होता है जो आंतरिक पाचन को सुधारने में मदद करता है।   \

तिल के नुकसान:

    1. उच्च कैलोरी: तिल में उच्च कैलोरी होती है, इसलिए अधिक मात्रा में सेवन से वजन बढ़ सकता है।
    2. ऑक्सलेट्स: तिल में ऑक्सलेट्स होते हैं, जो किडनी स्टोन के उत्पादन का कारण बन सकते हैं। यदि किसी को पहले से किडनी स्टोन की समस्या हो, तो तिल का अधिक सेवन करना उनकी स्थिति को और भी खराब कर सकता है।
    3. ऑलर्जी: कुछ लोग तिल के सेवन से त्वचा और शरीर में खुजली, चिढ़ान आदि की समस्या का सामना कर सकते हैं।
    4. गैस और एसिडिटी: तिल में पाये जाने वाले विटामिन और मिनरल्स के साथ-साथ तत्व एसिडिटी और गैस की समस्या को बढ़ा सकते हैं।

कृपया ध्यान दें कि यह धार्मिक और परंपरागत ज्ञान होते हैं और इनका वैज्ञानिक आधार नहीं हो सकता है। यदि आपको किसी विशिष्ट शकुन या अपशकुन के बारे में अधिक जानकारी चाहिए, तो आपको अपने क्षेत्र के धार्मिक विशेषज्ञ से परामर्श करना उपयुक्त होगा।

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