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Baruthani Ekadashi

Baruthani Ekadashi

बैशाख मॉस की कृष्ण पक्ष की एकादशी को यह मनाई जाती है. इस दिन व्रत करके जुआ खेलना, नींद, मदिरा पान, दंतधानव, परनिंदा, स्रुद्रिता, चोरी, हिंसा, रति, क्रोध तथा झूठ को त्यागने का महात्मय है. एसा करने से मानसिक शांति मिलती है. व्रती को फलाहार खाना चाहिए. परिवार के सदस्यों को रात्रि को भगवद भजन करके जागरण करना चाहिए.

कथा :-

प्राचीन काल में नर्मदा तट पर मांधाता नामक राजा राज्य करता था. वह अत्यंत ही दानशील और तपस्वी राजा था.

एक दिन तपस्या करते समय जंगली भालू राजा मांधाता का पैर चबाने लगा. थोड़ी देर बाद भालू राजा को घसीटकर बन में ले गया. राजा घबराकर विष्णु भगवन से प्रार्थना करने लगा. भक्त की पुकार सुनकर विष्णु भगवान ने अपने सुदर्शन चक्र से भालू को मार कर अपने भक्त की रक्षा की.

भगवन विष्णु ने राजा मांधाता से कहा – हे वत्स ! मथुरा में मेरी बाराह अवतार मूर्ति की पूजा बरुथानी एकादशी का व्रत रखकर करो. उसके प्रभाव से तुम पुनः अपने पैरों को प्राप्त कर सकोगे. यह तुम्हारे पूर्व जन्म किआ वर्ष भर का अपराध था. राज ने इस व्रत को अपार श्रद्धा से किया तथा पैरों को पुनः प्राप्त कर लिया.

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