July 6, 2020

Spirituality

अध्यात्म का जीवन अपनाएं और जीवन में सुख ही सुख पाएं

भाग दौड़ भरी जिंदगी में आज मनुष्य इतना व्यस्त हो चूका है कि उसे दूसरों के बारे में तो दूर की बात है, मनुष्य खुद के बारे में भी समय निकलकर सोचने का समय नहीं है. यही वजह है कि आजकल तकरीबन हर व्यक्ति किसी न किसी परेशानीज जूझ रहा होता है. लेकिन व्यक्ति खुद को पहचान ले तो वह काफी हद तक खुशहाल रह सकता है.
अधयात्म का मतलब है खुद के बारे में अच्छे से जानना और अपने व्यहवार को समझना. अगर आप अपने क्रोध, दुःख सुख और क्लेश को पहचानते हैं और यह जानते है कि इन सबके पीछे आप खुद जिम्मेदार है या यूं कहें कि इन सबके आप खुद ही निर्माता हैं तो आपको मालूम होना चाहिए कि यही तो अध्यात्म का रास्ता है.

गीता हमें यही बताती है. गीता के आठवें अध्यन में लिखा है कि “परम स्वभावो अध्याममुच्चते” गीता भी जीवात्मा को ही अध्यात्म बता रही है. वैसे तो यह भी कहा जाता है कि आत्मा परमात्मा का ही अंश है. जब हम अपनी आत्मा से ही दूर हो जाते हैं तो जाहिर सी बात है बात है हमारे अंदर एक संशय अविश्वाश और तरह तरह की नकारात्मकता घर करती जाती है.
अध्यात्म किसी भी व्यक्ति के आंतरिक जीवन के विकास के लिए बहुत जरुरी है. जब आप अध्यात्म के रस्ते पर होते हैं तो आप ऐसा कार्य करते हैं, जिसमें खुद का हित न होकर सभी की भलाई जुड़ी होती है. ऐसा करने से इर्ष्या, लालच क्रोध और अहंकार जैसी चीज़े में मन में आसानी से घर नहीं पाती.
अध्यात्म से अपने नहीं बल्कि दूसरों के प्रति भी प्रेम जगता है. अध्यात्म के जरिए जब आत्मा, परमात्मा जुड़ जाती है. सभी प्राणी के प्रति खुद के अंदर दया और करुणा का भाव जागृत होता है. अध्यात्म से इतर किसी एक चीज़ तक सिमित नहीं रहता, बल्कि अध्यात्मिकता से मनुष्य खुद में ही आनंद तलाश