मंत्र संग्रह

 

क्लेशनाशक मंत्र :

।। ॐ श्रीकृष्णाय शरणं मम। या कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने।

     प्रणत क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नम: ।।

चिंता मुक्ति मंत्र :

।। ॐ नम: शिवाय।।

शांतिदायक मंत्र :

।। राम… राम… राम…।।

संकटमोचन मंत्र :

।। ॐ हं हनुमते नम:।।

शांति, सुख और समृद्धि हेतु :

।। शांताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम्।

विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्।।

लक्ष्मीकान्तंकमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्।

वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्।।

मृत्यु पर विजय के लिए महामृंत्युजय मंत्र :

।। ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिंपुष्टिवर्द्धनम्।

 उर्वारुकमिव बन्धानान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ।।

सिद्धि और मोक्षदायी गायत्री मंत्र :

।। ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात् ।।

समृद्धिदायक मंत्र :

।। ॐ गं गणपते नम: ।।

अचानक आए संकट से मुक्ति हेतु :

।। ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं परमेश्वरि कालिके स्वाहा ।।

दरिद्रनाशक मन्त्र  :

।। ॐ ह्रीं ह्रीं श्री लक्ष्मी वासुदेवाय नम:।।

भैरव मंत्र :

।। ॐ कालभैरवाय नम:।।

नवग्रह शांतिकर्म
रवि मन्त्र :-
ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं सः सूर्याय नमः ।
प्रयोग विधि :- इस मन्त्र के सात हजार जप करें तथा लाल चन्दन व् लाल पुष्प से प्रातः सूर्यनारायण की पूजा कर अर्घ दें ।
सोम मन्त्र :-
ॐ श्राँ श्रौँ सः चन्द्रमसे नमः ।
प्रयोग विधि :- इस मन्त्र के ग्यारह हजार जाप करें ।
मंगल मन्त्र :-
ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः ।
प्रयोग विधि :- इस मन्त्र के दस हजार जप मध्याहन में करें तथा लाल चन्दन व् कन्नेर के लाल पुष्प से मंगल गृह की पूजा करें ।
बुध मन्त्र :-
ॐ ब्राँ ब्रीँ ब्रौँ सः बुधाय नमः।
प्रयोग विधि :- इस मन्त्र के नौ हजार जप करें तथा बहुरंगी पुष्पों से बुध गृह की पूजा करें ।
गुरु मन्त्र :-
ॐ ज्राँ ज्रीँ ज्रोँ सः गुरुवे नमः ।
प्रयोग विधि :- इस मन्त्र के उन्नीस हजार जप करें तथा पीले पुष्प व् केसर के चन्दन से गुरु गृह की पूजा करें ।
शुक्र मन्त्र :-
ॐ द्राँ द्रीँ द्रौँ सः शुक्राय नमः ।
प्रयोग विधि :- इस मन्त्र के सोलह हजार जप करें तथा श्वेत पुष्प और श्वेत चन्दन से शुक्र गृह की पूजा करें ।
शनि मन्त्र :-
ॐ प्राँ प्रीँ प्रौँ सः शनये नमः ।
प्रयोग विधि :- इस मन्त्र का तेइस हजार जप करें तथा नीले पुष्प और चन्दन से शनि की पूजा करें । पूजा के समय तेल का दीपक अवश्य जलाएं ।
राहु मन्त्र :-
ॐ भ्राँ भ्रीँ भ्रौँ सः राहवे नमः ।
प्रयोग विधि :- इस मन्त्र के अठारह हजार जप करें तथा रात्रि के समय में नीले पुष्प व् चन्दन द्वारा राहु गृह की पूजा करें ।
केतु मन्त्र :-
ॐ प्राँ प्रीँ प्रौँ सः केतवे नमः ।
प्रयोग विधि :- इस मन्त्र के सत्रह हजार जप करें तथा धूम्र वर्ण के पुष्प और चन्दन द्वारा केतु गृह की पूजा करें ।