मंगल परिणय

शादी को सही चलाने के लिए अपनाए ये रास्ता  :

भारतीय संस्कृति में मंगल परिणय (शादी) को सबसे पवित्र संस्कार माना जाता है. जिसमें स्त्री और पुरूष एक दूसरे से जन्म जन्मांतर साथ रहने के कसमें खाते हैं. साथ ही एक दूसरे के पूरक बन जाते हैं. लेकिन दोनों की अच्छी तरह से जीवनयापन करने के लिए इस रिश्ते की भी अपनी मर्यादाएं और कुछ अपेक्षाएं होती हैं.

  • यह मर्यादाएं और अपेक्षाएं कुछ इस तरह है
  • विवाह को जो सुखी बनता है वह है एक दूसरे के प्रति सम्मान
  • एक दूसरे के गुणों और अवगुणों को स्वीकार करना इसके साथ ही एक दूसरे की आदतों को बदलने की जिद्द न करना
  • एक दूसरे की भावना को प्रधानता देना ही समझौता की ओर बढ़ाया गया पहला कदम होता है, और यह कदम ताड़ी साथ साथ उठाया जाना चाहिए.
  • विवाह को अच्छे से चलाने के लिए सबसे अधिक जो चीज मायने रखती है वो है दैहिक और आत्मिक दोनों संतुष्टि का समावेश आवश्यक है.
  • विवाह को बिना किस कलेश से अच्छे से चलाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है एक दूसरे के प्रति पूर्ण निष्ठा के साथ समर्पण
  • मंगल परिणय की सुखद कल्पना को इन्हीं सबसे पूर्ण किया जा सकता है.
  • पति पत्नी पूर्ण विशवास के साथ स्वतंत्रता दें ऐसा अकरने से किसी भी विवाह में अलगाव जैसा शब्द नहीं आएगा.