July 21, 2020

Laal Kitab

Laal Kitab

लाल किताब व गृह :-

हर गृह के कारक घर, स्थायी घर, उच्च-नीच घर आदि निश्चित हैं। फिर भले ही वह गृह ‘ अतिथि ‘ बने या किरायेदार ! गृह का समय पूरा होने पर दिया बुझ जाएगा।

हर गृह उसकी अपनी राशि मे, भले ही वह राशि अन्य गृह की कारक क्यों न हो, शुभ फल ही देगा।

गृह  जिस घर में बैठा होगा उस गृह की चीजें स्थापित करने से उसका प्रभाव बढ़ेगा। उदाहरणार्थ – केतु नोवे घर में बैठा हो तो कुत्ता पालने से केतु के प्रभाव मे बढ़ोत्तरी होगी।

नैसर्गिक जन्मकुंडली मे शुक्र की राशि राशि रहती है एवं दूसरा घर ब्रहस्पति का कारक है। यह यहाँ शुक्र बैठा हो तो उसके शुभ फल प्राप्त होंगे ।

तीसरे घर मे बुध की राशि रहती है। तीसरा घर मंगल का कारक है मंगल शुभ हो तो यहॉं बुध का भी शुभ फल मिलेगा ।

चौथे घर में चंद्र की राशि कर्क आती है। राशि स्वामी चंद्र है। यहॉं राहु का अशुभ फल प्राप्त नहीं होता ।

वर्ष जन्मकुंडली मे राहु चौथे घर मे बैठे तो राहु के कार्य – मकान की चैट बदलना, कोयले की बोरियों का संग्रह करना, नया पाखाना बनवाना, काले आदमी को साझेदार बनाना जैसे काम नहीं करने चाहिए अन्यथा झगड़े होते रहेंगे।

पंचवे घर मे सूर्य की राशि सिंह रहती है। इस घर के कारक गृह ब्रहस्पति तथा सूर्य हैं । इस घर मे इसके शुभ फल ही प्राप्त होंगे।

छठे घर मे केतु की राशि कानी पड़ती है। यह केतु का कारक घर है। यहां बुध के शुभ फल मिलते हैं। यहॉं केतु होने पर उसकी चीजों पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। बुध-केतु साथ मे बैठे हों तो बुध के अच्छे ओर केतु के बुध फल मिलेंगे।

सातवें घर मे शुक्र की राशि तुला रहती है यह घर शुक्र एवं बुध का कारक घर है। यहॉं शुक्र के शुभ फल मिलते हैं एवं बुध दूसरे ग्रहों की मदद करता है।

आठवें घर मे मंगल की राशि ब्रशचिक रहती है। यह मंगल, शनि एवं चंद्र का कारक घर है। ये तीनों गृह ननमकुंडली में अलग-अलग घरों में बैठे हों तो अच्छा फल प्राप्त होता है। इकट्ठे होने पर अशुभ फल देते हैं। वर्षफल में आठवें घर मे अशुभ गृह आने पर उसके अशुभ फल ही मिलेंगे।

लाल किताब के अनुसार नौवां घर भाग्य का प्रारंभ और किस्मत भी बतलाता है। जन्मकुंडली में इस घर का सर्वाधिक महत्व है। सारी जन्मकुंडली के फल को नौवां घर प्रभावित करता है। जातक के पुरुषार्थ रूपी कर्मों का अंतिम निर्णय भाग्य से ही होता है। काल के तीनों खंडों मे भूतकाल इस घर का विषय है।

नोवे घर मे ब्रहस्पति की राशि धनु पड़ती है। इसका कारक ब्रहस्पति है तथा शनि राशिफल का है और ब्रहस्पति ग्रहफल का। शनि का कोई उपाय नहीं, ब्राहस्पति का उपाय है, इस घर मे ब्राहस्पति और सूर्य के अच्छे फल प्राप्त होते हैं। धरती के नीचे रहनेवाली वनस्पति का यह कारक घर है।

दसवां घर विश्वासघाती माना जाता है। इस घर में बैठे गृह विश्वासघाती होते हैं। विश्वासघाती गृह दूसरे एवं ग्यारहवें घर मे लाभदायक बनते हैं।

ग्यारहवां घर ब्रहस्पति का स्थायी घर है। यहां शनि शुभ फल देता है। शनि के अलावा काफी गृह अशुभ फल प्रदान करते हैं। ग्यारहवें घर मे शनि की राशि कुंभ पड़ती है। इस घर का कारक गृह शनि है।

जन्मकुंडली मे शुभ या अशुभ गृह जब खुद की अपनी राशि मे या कारक घर मे आते हैं तब शुभ फल देते हैं।  जन्मकुंडली में बैठा उच्च गृह जब वर्ष जन्मकुंडली में बवही उछ का होकर बैठे तब उच्च गृह शुभ फल देता है।

कोई भी अशुभ या शुभ गृह चाहे जिस घर में बैठा हुआ हो, वह निम्नानुसार अन्य घरों में भी फलदायी होगा।

1- ब्रहस्पति-शुक्र अशुभ असरदार हों तो दूसरे और छुटहे घरों में भी वे अशुभ फल देंगे।

2- पहले घर मे बुध होने पर सूर्य, मंगल तथा शनि भी फलदायी होंगे।

3- दूसरे घर में ब्रहस्पति होने पर शुक्र भी फलदायी होगा।

4- तीसरे घर मे बुध होने पर मंगल एवं शनि भी फलदायी होंगे।

5- चतुर्थ घर मे ब्रहस्पति होने पर सूर्य और चंद्र भी फलदायी होंगे।

6- पंचवे घर मे ब्रहस्पति होने पर सूर्य, राहु एवं केतु भी फलदायी होंगे।

7- छठे घर मे केतु होने पर शुक्र भी फलदायी होगा।

8- सातवें घर मे शुक्र होने पर बुध भी फलदायी होगा।

9- आठवें घर मे मंगल होने पर शनि, चंद्र भी फलदायी होंगे।

10- दसवें घर मे शनि होने पर राहु-केतु भी फलदायी होंगे।

11- ग्यारहवें घर मे शनि होने पर ब्रहस्पति फलदायी होगा।

12- बारहवें घर मे राहु होने पर ब्रहस्पति, शनि फलदायी होंगे।