जीवन के मूल मन्त्र …

भवन निर्माण से पहले करें ये 10 काम …
ग्रहों के दुष्प्रभावों का शमन :-
गृह मानवीय जीवन पर अपना भला या बुरा प्रभाव डालते हैं …ग्रहों का भला बुरा परिणाम होता है कि नहीं – यह विवाद का विषय नहीं वल्कि अनुभव करने की बात है ।
लाल किताब का मूल उद्देश्य यह है कि सामान्य-से-सामान्य आदमी अपनी जन्मकुंडली के अनिष्ट ग्रहों के परिणामों को दूर करके सुखी जीवन जी सके । लाल किताब ने कभी भी गृह परिधान का उपाय नहीं बताया है और न ही खर्चेवाले धार्मिक कर्मकांडो की वकालत की है । यही कारण है इस लाल किताब में हर सन्दर्भ में जहां-तहां उपाय बताए गए हैं । यहां कुछ अनुभव सिद्द और विशिष्ट उपाय पाठकों के लाभार्थ दिए जा रहे हैं ।
भवन संबंधी उपाय :-
1- गृह प्रवेश से पहले तुलसी का पौधा, अपने इष्ट देवता तस्वीर, पानी से भरा कलश एवं गाय को प्रवेश करना अति शुभकारी होता है । इससे घर में सुख शांति आती है । और संपन्नता बढती है ।
2- भवन की नींव भरते समय शहद से भरा बर्तन दबा दें । इससे जातक आजीवन खतरों से मुक्त रहेगा ।
3- यदि जन्मकुंडली में शनि अशुभ हो तो गृह निर्माण करने से पूर्व गौदान करें ।
4- शनि जन्मकुंडली के चौथे घर में स्थित हो तो जातक को पैत्रिक भूमि पर मकान नहीं बनाना चाहिए । यदि जातक एसा करता है तो परिवार के सदस्यों को जिंदगीभर कस्ट उठाने पड़ते हैं पुत्र रोगी रहता है । तंदुरुस्त होने की हालत में किसी झूठे मुकद्दमे में फसकर कारावास की सजा उसे भुगतनी पड़ती हैं ।
5- शनि जन्मकुंडली के छठे घर में हो तो भवन निर्माण के पूर्व उस भूमि पर हवन आदि करें और जमीन को शुद्द कर लें जिससे केतु का प्रभाव मंदा पड़ जाता है ।
6- जन्मकुंडली के ग्यारहवे घर में शनि हो तो मुख्य द्वार की चोखट बनाने से पूर्व उसके नीचे चन्दन दावा दें ।
7- एक बार भवन निर्माण का कार्य प्रारंभ हो जाये तो बीच में उसे रोकें नहीं अन्यथा अधूरे माकन में राहू का वास होगा ।
8- भवन निर्माण कराने से पूर्व भवन निर्माण करनेवालों (कारीगरों) को मिठाई खिलाएं ।
9- भवन निर्माण करते समय जमीं में से या जमीं पर चीटियाँ निकले तो उन चीटियों को शक्कर एवं आटा खिलाएं ।
10- भवन के मालिक की जन्मकुंडली में पांचवे घर में केतु हो तो भवन निर्माण से पहले केतु का दान अवश्य दें ।
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संतान संबंधी उपाय :-
1- संतान प्राप्ति के लिए ‘संतान गोपाल स्त्रोत्रम’ का पाठ करें । गणेश जी की आराधना करें ।
2- संतान नहीं हो रही हो तो अपने भोजन का आधा हिस्सा गाय को खिलाएं । जातक पीपल के पेड़ का जलसिंचन करें ।
3- संतान को दीर्घ आयु बनाने के लिए पिता को वृहस्पति का व्रत करना चाहिए ।
4- अपनी पत्नी को उचित सम्मान दें ।
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रोग मुक्ति के उपाय :-
1- रोग मुक्ति के लिए अपने भोजन का चौथाई हिस्सा गाय को और चौथाई हिस्सा कुत्ते को खिलाएं ।
2- घर में कोई बीमार हो जाये तो उस रोगी को शहद में चन्दन मिला कर चटायें ।
3- पुत्र रोगी हो तो कन्याओं को हलवा खिलाएं ।
4- केतु के अनिष्ट प्रभाव के कारण रोग हो जाये तो तंदूर की मीठी रोटी कोवे को खिलाएं ।
5- पत्नी ज्यादा बीमार हो तो गौ दान करें ।
6- पुत्री बीमार हो तो पीपल के पेड़ की लकड़ी उसके सिरहाने रखें ।
7- मंदिर में गुप्त दान करें । कभी किसी को अपने दान के वारे में कभी न बताएं ।
8- अपने परिवार की सलामती के लिए रविवार के दिन बूंदी के सवा किलो लड्डू मंदिर में प्रसाद रूप बांटें ।
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दान सम्बन्धी उपाय :-
1- नीच गृह की वस्तुओं का दान कभी भी न लें । यदि गृह उच्च का हो तो गृह सम्बन्धी दान न करें ।
2- चन्द्र अगर जन्मकुंडली के छठे घर में हो तो एसे जातक को पानी की प्याऊ लगाना, धर्मशाला का निर्माण कराना, कुएं खुदवाना, गरीबों को भोजन खिलाना गोदान करना आदि सभी जनकल्याण के कार्य कतई नहीं करने चाहिए । एसा करने से वंश वृद्धि रुक जाति है ।
3- जन्मकुंडली के आठवें घर में शनि होने पर भोजन, धन, वस्त्र, गाय आदि का दान नहीं करना चाहिए ।
4- जन्मकुंडली के पांचवे घर में ब्रहस्पति हो तो धन का दान न करें ।
5- जन्मकुंडली के नॉवे घर में ब्रहस्पति बैठा हो तो मंदिर या किसी भी धार्मिक कार्य के लिए दान नहीं करना चाहिए ।
6- जन्मकुंडली के नौवें घर में शुक्र बैठा हो तो धन या अनाज से संम्बंधित दान नहीं करना चाहिए ।
7- जन्मकुंडली के बारहवें घर में चन्द्र बैठा हो तो पंडित या अन्य किसी व्यक्ति से कोई भी धार्मिक कार्य संम्पन्न नहीं कराना चाहिए और न ही दान देना चाहिए ।
8- जन्मकुंडली के सातवें घर में ब्रहस्पति बैठा हो तो पुरोहित को धन या अनाज दान में न दें ।
9- जन्मकुंडली के छठे घर में शनि अशुभ होतो निकट संम्बन्धी के विवाह में शामिल न हों या उसे विवाह के लिए आर्थिक सहयोग न दें । किसी कन्या के विवाह के लिए आप धन स्वयं खर्च करें । अपने पुत्र या पत्नी से नहीं कराएँ ।
10- जन्मकुंडली के दुसरे घर में राहू हो तो तेल या चिकनाई वाले पदार्थों का दान नहीं करना चाहिए ।
11- जन्मकुंडली में शुक्र चोथे घर में बैठा हो साथ में राहू भी हो तो सोना दान में नहीं देना चाहिए ।
12- जन्मकुंडली के आठवें घर में राहू सूर्य के साथ बैठा हो तो कन्या के विवाह पर ब्राह्मण को दान न दें ।
13- जन्मकुंडली में शनि अशुभ चल रहा हो तो चांदी का दान न करें ।
14- जन्मकुंडली के सातवें घर में केतु बैठा हो तो लोहा या लोहे से बनी बस्तु का दान न करें ।
15- जन्मकुंडली के चौथे घर में मंगल बैठा हो तो वस्त्र का दान कभी नहीं करना चाहिए ।