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अंगूठे की पहिचान

धयान पूर्वक देखें तो अंगूठे में तीन भाग प्रतीत होते है । पहला वह भाग कहलाता है जो नाख़ून से चिपका हुआ होता है । हस्त-रेखा-विज्ञानं के अनुसार, इनमें पोरुआ ‘सत’ दूसरा ‘रज’ तथा तीसरा ‘तम’ को स्पस्ट करता है । इनको हम उध्र्व भाग, मध्यम भाग तथा अधो भाग भी कह सकते हैं । उर्ध्व भाग, विज्ञान और इच्छा शक्ति का घोतक होता है । मध्य भाग तर्क एवं विचार का पतिनिधित्व करता है तथा तीसरा अधो भाग प्रेम, वैराग और स्नेह को सूचित करता है ।

प्रथम पोरुआ – जिस मनुष्य के अंगूठे का प्रथम पोरुआ दुसरे पोरुए से लम्बा हो, उस व्यक्ति में इच्छा-शक्ति प्रबल होती है तथा निर्णय लेने में स्वतंत्र होता है । ऐसे व्यक्ति किसी की अधीनता में रह कर कार्य नहीं कर पाते । ऐसे व्यक्ति धार्मिक विचारों में गहरी आस्था रखने वाले होते हैं । तथा इनका स्वयं का व्यक्तित्व इतना प्रबल तथा आकर्षण होता है कि देखते ही इनके व्यक्तित्व का प्रभाव सामने वाले पर पड़ जाता है । ब्रद्धावस्था में ये अधिक संवेदनशील व् सुखी होते हैं ।

यदि प्रथम तथा दूसरा पोरुआ बराबर लम्बा एवं मोटा होता है तो ऐसा व्यक्ति समाज में सम्माननीय स्थान प्राप्त करने में सफल होता है । न तो ये किसी को धोखा देते हैं और न किसी से ये व्यक्ति सहज में ही धोखा खाते हैं । जीवन में इनके मित्रों की संख्या बहुत ज्यादा होती है तथा समाज में इसे कवित, लोकप्रिय होते हैं । कठिन ले कठिन परिस्थितियों में भी इन्हें मुस्कराते हुए देखा जा सकता है घबराते नहीं ।

दूसरा पोरुआ – अंगूठे का दूसरा पोरुआ तर्क-शक्ति का स्थान माना गया है । यदि दूसरा पोरुआ पहले पोरुए से बड़ा और मजबूत हो तो इससे यह सिद्ध होता है कि व्यक्ति में तर्क शक्ति के सामने किसी को भी टिकने नहीं देगा । परन्तु इस प्रकार के व्यक्तियों में एक कमजोरी यह होती है कि ये अपनी उचित और अनुचित सभी बैटन को तर्क शक्ति के सहारे मनवाने की कोशिश करते हैं । यदि कभी तर्क-शक्ति में अपना पलड़ा कमजोर होता देखते हैं तो हो-हल्ला मचाकर अपनी विजय सिद्ध करने का प्रयत्न करते हैं । इन्हें ब्क्बली और वाचाल तक कहा जाता है । यदि किसी व्यक्ति के हाथ में यह पोरुआ पतला हो तो ऐसे व्यक्ति अपने दिमाग से काम न लेकर जो भी जी में आता है मुह पर बक देते हैं । इसे व्यक्ति अपने अधिकारीयों की गलती निकलने में तत्पर रहते हैं ।

यदि पहला और दूसरा पोरुआ बराबर लम्बाई और चौड़ाई तथा मोती लिए हुए हों तो व्यक्ति शांत मस्तिष्क के कहे जाते हैं । जीवन में प्रत्येक कदम सावधानी के साथ उठाते हैं । इनमे आत्म-विश्वास भी प्रबल रूप में होता है । सही शब्दों में कहा जय तो ये व्यक्ति सभ्य, ऊँचे स्टार के व्यापारी महत्वपूर्ण पदों पर अधिकारी और माने कलाकार होते हैं ।

यदि पहले पोरुए की अपेक्षा दूसरा पोरुआ कमजोर पतला और दुर्बल हो तो ऐसे व्यक्ति अपनी इच्छा से न चलकर दूसरों की अधीनता में ही चलना पसन्द करते हैं । सही रूप में ये स्वयं कोई निर्णय नहीं लेते । जीवन में ये किसी भी प्रकार का कोई कार्य बिना योजना के ही प्रारम्भ कर देते हैं, जिससे उस कार्य के अंत में इन्हें हमेशा असफलता ही मिलती ही मिलती है । इनके विचार अस्थिर होते हैं । इनकी प्रव्रत्ति झगड़ालू होती है और जीवन में ये असफल व्यक्ति कहे जाते हैं ।

ऐसे व्यक्ति भाग्यवादी होने के साथ-साथ आलसी भी होते हैं ।

अंगूठे के प्रष्ट भाग पर पाये जाने वाले रोमों (बालों) का भी महत्त्व भी हस्त-रेखा में है ।

अंगूठे पर रोमों का पाया जाना बुद्धिमान की निशानी है । परन्तु अगुष्ठ पर लाल-भूरे रंग के बल ही शुभ मने जाते हैं । काले रंग के बालों को अशुभ कहा गया है । प्रत्येक रोम-छिद्र से लाल या भूरा एक-एक बल निकले तो व्यक्ति को राज्य सर्कार में उच्च पद या मान-सम्मान (नेता) का सूचक है । यदि एक छिद्र से दो-दो बाल निकलें तो व्यक्ति विद्वान, लेखक, शास्त्रों को जानने वाला व् दार्शनिक (Philosopher) होता है । परन्तु दो से अधिक बल एड छिद्र ले निकलना शुभ न होकर अशुभ मन गया है । जितने ज्यादा बाल एक छिद्र से निकलते हैं जातक उतना ही गरीब निर्धन पाया जाता है ।

तीसरा भाग – अंगूठे का तीसरा भाग पोरुआ न कहलाकर शुक्र का स्थान कहलाता है ।

प्रथम दो पोरुओं को अपेक्षा यह भाग निश्चय ही उन्नत, सुद्रढ़ एवं ऊँचा उठा हुआ, सुन्दर और किन्चित गुलाबी आभा लिए हुए होता है तो एसा व्यक्ति प्रेम और स्नेह के क्षेत्र में काफी बाढा-चढ़ा होता है । समाज में इसे व्यक्ति आदर प्राप्त करते हैं तथा मित्रों में भरपूर लोकप्रियता अर्जित करने में सफल होते हैं । ये व्यक्ति कठिनाइयों में भी मुस्कुराते रहते हैं और अपने प्रत्नों से जीवन में पूर्ण सफलता प्राप्त करके ही रहते हैं ।

यदि शुक्र का पर्वत बहुत अधिक उठा हुआ दिखाई दे४ तो एसा व्यक्ति भोगी और कमी होता है तथा सौन्दर्य के पीछे भटकने वाला मन जाता है प्रेम और सौन्दर्य के लिए यह सब कुछ करने के लिए तैयार रहता है । आवेश में यह कुछ भी आगा-पीछा नहीं सोचता । यदि यह क्षेत्र दवा हुआ या कम उन्नत होता है अथवा इस क्षेत्र पर जरुरत से ज्यादा रेखाएँ एवं जाल दिखाई दे तो एसा व्यक्ति निराशावादी प्रव्रत्ति का होता है । इनका प्रेम भी शुद्ध प्रेम न होकर उस प्रेम के पीछे भी वासना स्वार्थ छिपा हुआ होता है । ये लम्बी-लम्बी योजनाएँ बनाते हैं । दिवा-स्वप्न देखते रहते हैं पर ये अपने उद्देश्यों में पूर्णत सफलता प्राप्त नहीं कर पते हैं । इनको पूर्ण यश कभी नहीं मिलता । इनको कलह पूर्ण कहा जाता है तथा वैवाहिक जीवन में बाधाओं का सामना करना पड़ता है । जीवन भी कलह पूर्ण होता है । इस प्रकार तीनों खण्डों का वर्णन करने के पश्चात् हम अंगूठे के विभिन्न प्रकारों का जिक्र करना भी आवश्ययक समझते हैं । वैसे तो प्रमुखत अंगूठे के दो प्रकार यानि “सीधा या सुद्रढ़ अंगूठा”  व कोमल और झुका हुआ अंगूठा है । परन्तु विद्वानों ने अंगूठे के कुछ और भेद भी लिखे है । जो इस प्रकार से हैं ।

  1. पैडिल अंगूठा (Paddle Thumb)
  2. ढीला कोमल अंगूठा  (Soft Thumb)
  3. चौड़ा अंगूठा (Broad Thumb)
  4. मजबूत अंगूठा (Strong Thumb)
  5. लचीला अंगूठा (Flexible Thumb)
  6. भीरु अंगूठा (Nervous Thoumb)
  7. कठोर अंगूठा (Stiff Thumbs)
  8. प्रारम्भिक अंगूठा (Elementry Thumb)
  9. साधारण अंगूठा (General Thumb)
  10. गद्देदार अंगूठा (Padded Thumb)

Author: Good luck

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