kaal sarp yog

(2-) कुलिक कालसर्प योग –केतु तीसरे व् राहू आठवें भाव में हो तो कुलिक कालसर्प योग होता है ।

परिणाम –

  1. जातक की स्त्री कुरूप, निर्मोही, अल्पज्ञ, अनपढ़, अतिभोगी, अविश्वासी होती है ।
  2. संतान सुख न्यूनतम रहेगी । पुत्र होकर भी क्रूर, दुष्ट, अवज्ञा करने वाला, अर्थात जातक को संतान सुख नहीं के बराबर होगा ।
  3. जातक के स्वास्थ्य में गिरावट रहेगी । जातक अपने भविष्य, वृद्धावस्था को लेकर सदैव चिंतित रहेगा ।
  4. जातक के गुर्दों की बीमारी, मूत्ररोग, मस्से की बीमारी पीड़ा देती है ।
  5. जातक अपने जीवन में अनेक स्त्रियों से संसर्ग कर अपमानित होता है । 
  6. पिता की म्रत्यु अल्प आयु में हो जाती है ।
  7. आर्थिक विषमता आभाव, धन की कमी पीछा नहीं छोडती है। अथक परिश्रम निरन्तर संघर्ष करके भी जातक आर्थिक पक्ष भी नहीं सधार पता है। आय की अपेक्षा व्यय अधिक होता है ।
  8. अपशय, निरादर, अपमान, उपेक्षा, आलोचना से जातक घिरा रहता है ।
  9. कौटुम्बिक कलह से जातक पीड़ित रहता है । शेष अगले पोस्ट में …

Author: Good luck

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