Mount palm reading

ज्योतिष में हस्त रेखा देखना सीखने के लिए हथेली में दिए गए पर्वतों का ज्ञान होना अति आवश्यक है । जिससे कि व्यक्ति के ग्रहों की सटीक व् स्पस्ट जानकारी मिल सके –

  1. सूर्य पर्वत
  2. चन्द्र पर्वत
  3. मंगल पर्वत (प्रथम)
  4. मंगल पर्वत (द्वितीय)
  5. बुध पर्वत
  6. गुरु पर्वत
  7. शुक्र पर्वत
  8. शनि पर्वत

अगर कोई भी क्षेत्र उभरा हुआ अथवा उन्नत हो तो जातक पर क्या प्रभाव डालता है और अगर दबा हुआ हो तो क्या बुरा प्रभाव डालता है यह हम आगे इसी प्रकरण में पढेंगे ।

सूर्य पर्वत

  • अनामिका ऊँगली के मूल स्थान में सूर्य पर्वत का स्थान है । ह्रदय रेखा से ऊपर अनामिका के मूल तक तथा शनि और बुध पर्वतों के बीच सूर्य पर्वत स्थित है ।
  • यदि सूर्य पर्वत उभरा हुआ हो तो जातक कला प्रेमी, संगीत, साहित्य, शिल्पकला में निपुण, आत्मविश्वासी, दयालु, धनवान, भाग्यवान, भाबुक, उदार, ग्रहों के बीच राजा है । सूर्य पर्वत अच्छा होने पर व्यक्ति राजकीय कार्यों में निपुणता तथा सफलता प्राप्त करता है । अगर हाथ में अन्य शुभ चिन्ह हों तो एसा व्यक्ति राजसुख या पद प्रतिष्ठा हासिल करके सुखी जीवन व्यतीत करता है ।
  • अगर सूर्य पर्वत अत्यधिक उभरा हुआ हो तो जातक घमंडी, अविवेकी, वाचाल, चंचल, कृपण होता है और पैत्रिक सम्पत्ति का नाश करता है । बाप दादा की कमी को हर वक्त अपने मौज मेले में नष्ट करता है ।
  • अगर सूर्य पर्वत नीचा हो तो जातक भाग्यहीन होता है । ऐसा व्यक्ति कपटी, अविवेकी, कला और साहित्य में रूचि विहीन, मुर्ख तथा निष्ठुर होता है ।
  • यदि सूर्य पर्वत, बुध पर्वत के साथ मिला हुआ हो अर्थात दोनों पर्वत इस प्रकार मिले हुए हों कि दोनों एक हो दिखें, तो जातक इमानदार, व्यवसायी, विद्वान, पशुधन से युक्त, व्यवहार दक्ष होता है । स्त्री के हाथों में ऐसी स्थिति उन्हें सुन्दर, सुखी, प्तिसेविका, हंसमुख, सुशिल बनती है ।
  • यदि सूर्य पर्वत, शनि पर्वत की ओर झुका हुआ हो तो जातक धन-धान्य से युक्त, भोग विलास में व्यस्त रहता है । एसा व्यक्ति परिश्रमी, साहसी, धार्मिक भी होता है । इसके कई नौकर होते हैं । इसके बड़े-बड़े अधिकारीयों, मंत्री तक संपर्क होते हैं । अगर स्त्री के हाथ में सूर्य पर्वत शनि की ओर झुका हो तो ऐसी स्त्री क्रोधिनी, कार्य में असफल, चतुर व् पति अनुरक्ता होती है ।
  • यदि हाथ में सूर्य पर्वत के साथ-साथ चन्द्र पर्वत भी उभरा हुआ हो, शेष पर्वत दबे हुए हों तो जातक शिल्प कला तथा साहित्य के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करता है और अपने क्षेत्र में लोकप्रियता करता है । ऐसा व्यक्ति न्यायप्रिय, विचारवान तथा निष्कपटी होता है ।
  • अगर सूर्य पर्वत के साथ-साथ बुध पर्वत भी उभरा हुआ हो तो एसा व्यक्ति अच्छा वक्ता, समझदार, शास्त्रज्ञ, लेखक होता है । यह लोग बड़े होकर सम्पादक, अध्यापक, वकील, इंजिनियर, व्यापारी बनते हैं ।
  • यदि सूर्य और मंगल दोनों पर्वत उभरे हुए हो तो व्यक्ति सेना, पुलिस में उन्नति करता है । रासायनिक, शल्य, दन्त, चिकत्सक भी ऐसे लोग बन सकते हैं । यह लोग उधमी व् परिश्रमी होते हैं और कभी भी निठल्ले नहीं बैठते । ऐसे लोग अधिकतर निरोग रहते हैं । अधिकतर उन्हें खाज, खुजली, फोड़ा, फुंसी, रक्तार्श, नकसीर, चोट इत्यादि का डर रहता है ।
  • यदि सूर्य और ब्रहस्पति के पर्वत उच्च हों तो एसा व्यक्ति परोपकारी, धार्मिक प्रवृति वाला, उदार, मेघावी, विद्वान होता है । यह व्यक्ति पठनपाठन में अधिक दिलचस्पी लेते हैं तथा सफल साहित्यकार व् लेखक होते हैं । यह लोग प्रायः उच्च सरकारी पदों पर देखे गए हैं । आगर स्त्री के हाथ में दोनों पर्वत उच्च हों तो ऊपर लिखे गुणों के साथ-साथ वह 40 वर्ष की अवस्था के बाद धार्मिक करों में, इश्वर आराधना , तीर्थाटन में अपना चित्त लगाती है ।
  • अगर सूर्य पर्वत तथा शनि पर्वत सामान रूप से उभरे हुए हों तो जातक अन्यायी, क्रूर आतंक फ़ैलाने वाला होता है । किसी को क्लेश पहुचना अथवा किसी का क़त्ल करना अथवा करवाना इसके लिए खेल होता है । यदि स्त्री के हाथ में ऐसे लक्षण हों तो वह पर-पुरुषगार्नि, कुल्टा, वासनायुक्त होती है । ऐसी स्त्रियाँ वैश्य जैसी हो सकती हैं ।
  • यदि सूर्य पर्वत और शुक्र पर्वत सामान रूप से उभरे हुए हों तो जातक पराक्रमी, शक्तिशाली, धन-धान्य से युक्त परन्तु स्त्री के वशीभूत रहते हैं । यह लोग अच्छे रहन-सहन, अच्छे खाने के शौक़ीन होते हैं । यह लोग संगीत कला, साहित्य में रूचि रखते हैं । इनको कोई न कोई ऐव लग जाता है जैसे सुरा-सुंदरी इत्यादि । इनके दुश्मन अपने कुटुम्बी ही होते हैं ।
  • अगर सूर्य पर्वत पर त्रिकोण का चिन्ह हो तो जातक यश और प्रसिद्धि प्राप्त करता है परन्तु यदि सूर्य पर्वत पर गुणा का चिन्ह हो तो जातक का धन जुए अथवा सट्टे में नष्ट होता है ।
  • यदि सूर्य पर चतुर्भुज का निशान हो तो शुभ होता है ।
  • यदी सूर्य पर्वत दबा हुआ हो तो जातक को पीलिया जिगर, ह्रदय, मस्तक, मूत्राशय सम्बन्धी रोगों का भय रहता है ।

चन्द्र पर्वत

  • हथेली में शुक्र पर्वत के सामने, मंगल पर्वत के निचे मणिबंध तक चन्द्र का पर्वत अथवा चन्द्र क्षेत्र कहते हैं ।
  • यदि चंद्र पर्वत विकसित हो तो जातक सदाचारी, मधुरभाषी, दयालु, काल्पनिक, भ्रमणशील, मात्र सुख युक्त, थोड़ी अवस्था में विवाह करने वाला, साहित्यज्ञ, धन धन्य से युक्त होता है । अच्छे तैराकों के हाथों भी चन्द्र क्षेत्र उभरा हुआ होता है ।
  • यदि चन्द्र क्षेत्र अत्यधिक उभरा हुआ हो तो जातक झूठ बोलने वाला, व्यसनी, मुर्ख आलसी होता है ।
  • यदि चन्द्र क्षेत्र नीचा हो तो व्यक्ति अस्थिर चित्त वाला, रूखे स्वभाव वाला, कल्पना शक्ति से रहित होता है । ऐसे व्यक्तियों की स्मरण शक्ति प्रायः कमजोर होती हैं ।
  • यदि चन्द्र पर्वत मंगल पर्वत की और झुका हुआ हो तो उसमे मंगल के गुण भी पाए जाएंगे । एसा व्यक्ति कभी अत्यंत क्रोधी और कभी अत्यंत शांत होगा । अगर चन्द्र पर्वत केतु क्षेत्र की और झुका हुआ हो तो व्यक्ति दिवा स्वप्न देखने वाला, हवाई किले बनाने बाला शेखचिल्ली होता है । यदि हाथ में चन्द्र और शुक्र पर्वत विकसित हो और शेष पर्वत दबे हुए हों तो जातक धनवान होता है और हर प्रकार के सुख भोगता है । इसी प्रकार अगर चन्द्र और बुध क्षेत्र विकसित हो तो जातक बुद्धिमान, भाग्यशाली और हंसोड प्रवति का होता है । अगर चन्द्र और ब्रहस्पति क्षेत्र सामान रूप से उभरे हुए हों तो जातक वैभवशाली, उन्नतिशील, आजीवन सुखी होता है । यदि चन्द्र क्षेत्र पर स्टार ( तारे ) का चिन्ह हो तो जातक को पानी में डूबकर मरने का भय होता है । एसे व्यक्तियों को जलोदर रोग, काफ विकार, मूत्र विकार आदि रोगों का भय रहता है ।
  • यदि चन्द्र पर्वत पर त्रिकोण का निशान हो तो व्यक्ति गुप्त विधाओं में पारंगत होता है ।
  • यदि चन्द्र क्षेत्र पर वर्ग का निशान हो तो अशुभ चन्द्र के सभी दोष समाप्त हो जाते हैं ।
  • यदी चन्द्र पर्वत पर एक कड़ी रेखा हो तो जातक को भविष्य सम्बन्धी अन्तर्ज्ञान हो जाता है । होनी वाली घटना का पूर्वाभास हो जाता है ।
  • यदि किसी स्त्री के हाथ में चन्द्र क्षेत्र पर जली का निशान हो तो वह व्यभिचारिणी हो सकती है, उसे मृगी रोग हो सकता है ।
  • यदि चन्द्र रेखा जीवन रेखा से निकल कर चन्द्र पर्वत पर आए तो जातक विदेश जाकर खूब धन कमाता है ।
  • यदि मणिबन्ध से कोई रेखा निकलकर चन्द्र पर्वत को लांघकर मंगल पर्वत पर जाए तो समुद्र यात्रा का योग बनता है ।
  • यदि चन्द्र पर्वत अशुभ हो ( यानि अत्यधिक उभर हुआ हो अथवा कमजोर हो ) तो जातक दो उदार, वात, कफ विकार, वीर्य विकार, दम, लकवा रोग का भय रहता है ।

मंगल पर्वत

  • हथेली में ह्रदय रेखा के नीचे और चन्द्र पर्वत के ऊपर मंगल का स्थान है ।
  • यदि मंगल का पर्वत विकसित हो तो जातक साहसी, प्रभुत्वाकंक्षी, बलशाली होता है । यह लोग परिश्रमी, लड़ाई झगड़े में उत्साही, उपद्रवी, चंचल, खेलकूद, घुड़सवारी में रूचि लेने वाले होते हैं । सैनिकों के हाथों में प्रायः मंगल पर्वत विकसित देखा जा सकता है ।
  • यदि मंगल पर्वत अत्यधिक उठा हुआ हो तो जातक अकारण क्रोध करने वाला, घमंडी, दुर्वसनी, विषयानुरागी, निर्दयी, दुराचारी होता है । छोटी-सी बात पर झगड़ा मोल ले लेता है । यह व्यक्ति एक से अधिक विवाह करता है ।
  • यदि मंगल पर्वत दबा हुआ हो तो व्यक्ति डरपोक, नास्तिक, पैत्रक धन नष्ट करने वाला, व्यर्थ में झगड़ने होता है । ऐसा व्यक्ति अपनी पत्नी सुन्दर होने पर भी दूसरों की स्त्री पर नजर रखता है ।
  • यदि मंगल पर्वत पर स्टार ( तारे ) का चिन्ह हो तो एसा व्यक्ति का तो तलवार अथवा गोली से किसी की हत्या करता है अथवा आत्महत्या करता है ।
  •  यदि मंगल पर गुना का चिन्ह हो तो मुकद्दमेबाजी में जमीं-जायदाद संपत्ति आदि का नुक्सान होता है ।
  • यदि मंगल पर्वत पर जाली का निशान हो तो जातक की अचानक म्रत्यु होती है । ऐसा व्यक्ति आत्महत्त्या भी कर सकता है ।
  • यदि मंगल पर त्रिकोण का निशान हो तो जातक उत्तम सेनाधिकारी युद्ध कुशुल, पक्के निश्चय वाला होता है । यदि बुध पर्वत की ओर झुका हुआ हो तो जातक अच्छा गणितज्ञ, चतुर, चालक होता है ।

बुध पर्वत

  • यह पर्वत कनिष्ठिका अंगुली के निचे और ह्रदय रेखा के ऊपर स्थित है । यदि बुध पर्वत उभरा हुआ है तो जातक बुद्दिमान, कुशल वक्ता, कानून का ज्ञाता, बैज्ञानिक, कवी, धनि, पतिभावन होता है । यह व्यक्ति राजकीय उच्च सेवाओं में देखे जा सकते हैं । अच्छे बुध पर्वत वाले व्यक्ति व्यवसायी भी साबित होते हैं ।
  • यदि बुध पर्वत ऊँचा हो तो व्यक्ति अविश्वासी, ठग, अभिमानी, द्वेषी, विश्वासघाती होता है । ऊँची विध्या पाने में कठिनाई आती है ।
  • यदि बुध पर्वत, सूर्य पर्वत की और झुका हुआ हो तो जातक व्यापर कुशल, संपादक, वकील, नेता, व्योतिशी आदि हो सकता है । यह लोग किताबी-कीड़े होते हैं । अगर स्त्री के हाथ में ऐसी स्थिति हो तो वह विध्यापन का दुःख भोगती है ।
  • यदि किसी स्त्री के हाथ में बुध पर्वत उच्च हो तो वह राज्य में ऊँचे पद पर आसीन होती है । उनका यश चरों ओर फैलता है । परन्तु उसका चरित्र अच्छा नहीं होता । यह विलासिनी नीच पुरुष अथवा नौकरों से प्रेम करने वाली होती है ।
  • अगर बुध पर्वत पर त्रिकोण का निशान हो तो ऐसा जातक मान प्रतिष्ठा प्राप्त करता है । राजदूत एवं व्यापारी के रूप में पर्याप्त धन संपत्ति अर्जित करता है ।
  • अगर बुध पर्वत पर दो चार कड़ी रेखाएं हो तो वह डाक्टर अथवा कैमिस्ट होता है स्त्री के हाथ में ऐसी रेखाएं हो तो वह नर्स अथवा दाई होती है ।
  • यदि बुध पर्वत अत्यंत उच्च हो और उस पर गुना का चिन्ह हो तो जातक जुआरी होता है और अपनी पूरी संपत्ति दाँव पर लगा देता है ।
  • यदि बुध पर्वत अशुभ एवं निर्बल हो तो जातक मिथ्याभाषी होता है । ऐसे व्यक्तियों को उदार रोग, मदाग्नि, संग्रहनी, प्रेत बाधा का भय रहता है ।

गुरु (ब्रहस्पति) पर्वत

  • तर्जनी अंगुली के मूल में मस्तिष्क रेखा के ऊपर के क्षेत्र को ब्रहस्पति का पर्वत कहते है । यदि यह पर्वत उच्च हो तो जातक तेजस्वी, देशभक्त, भाग्यवान, उदार, मंत्री, न्यायाधीश, संपादक, धर्माचार्य, अध्यापक, योगी, साहित्यिक या भाविस्यवक्ता होता है । ऐसा व्यक्ति पुत्र-पौत्र से युक्त, धन-धन्य से युक्त, सत्यवक्ता, स्वतन्त्र प्रकृति वाला, विदेश भ्रमण करने वाला होता है ।
  • यदि ब्रहस्पति का पर्वत अत्यंत उभरा हुआ हो तो जातक धूर्त, स्वार्थी, अविश्वासी, मिथ्याभिमानी, क्रोधी, अपव्ययी होता है । ऐसा व्यक्ति कोई भी कम जिम्मेदारी से निभाता है । अगर स्त्री के हाथ में पर्वत की ऐसी स्थिति हो तो वह पर पुरुष गामिनी होती है । पुत्र की अभिलाषा में निक्रष्ट कार्य भी कर बैठती है ।
  • यदि गुरु पर्वत नीचा हो तो जातक पराधीन, चिडचिडे स्वभाव वाला होता है ।
  • यदि गुरु और बुध के पर्वत सामान रूप से उठे हुए हों तो ऐसा व्यक्ति कवी वैज्ञानिक, विद्वान, वक्ता, लेखक, संगीतज्ञ और ज्योतिषी होता है ।
  • यदि गुरु पर्वत पर एक सीधी रेखा कड़ी हो तो जातक को आने वाली घटनों का पुराब्हस हो जाता है ।
  • यदि गुरु क्षेत्र पर स्टार तारे का चिन्ह हो तो जातक धनि, उदार, क्षमाशील, सौभाग्यशाली, शादी के बाद अधिक तरक्की करने वाला होता है ।
  • यदि गुरु पर्वत पर त्रिकोण हो तो जातक सात्विक विचार वाला, उच्च पद प्राप्त करता है ।
  • अगर गुरु पर्वत पर गुणा का चिन्ह हो तो जातक का विवाह धनि और कुलीन परिवार में होता है ।
  • यदि गुरु पर्वत पर गुणा का चिन्ह हो तो जातक का विवाह धनि और कुलीन परिवार में होता है ।
  • यदि गुरु पर्वत पर वर्ग का निशान हो तो व्यक्ति असाधारण उन्नति करता है और राजकीय सेवाओं में उच्च पद प्राप्त करता है ।

शुक्र पर्वत

  • हथेली में अंगुष्ठ के मूल में मणिबंध तक उभरा हुआ क्षेत्र शुक्र पर्वत कहलाता है शुक्र वीर्य का स्वामी मन गया है । शुक्र का भावार्थ ही वीर्य होता है । निर्बलता आदि से मनुष्य के शारीरिक बल का अनुमान एवं स्त्री सुख के बारे में पता चलता है । यदि शुक्र का पर्वत अच्छा उठा हुआ हो तो जातक सदाचारी उदार, उच्चाभिलाषी, संगीतज्ञ, न्रात्यप्रेमी, सौन्दर्य प्रेमी, कलाप्रिय होता है । वकालत में भी नाम कमा सकता है ।
  • यदि शुक्र पर्वत अत्याधिक उभरा हुआ हो तो जातक व्यभिचारी, परस्त्रीगामी, निर्लज, घमंडी होता है ।
  • अगर शुक्र पर्वत दबा हुआ हो तो जातक वीर्य सम्बन्धी रोगों से पीड़ित रहता है यदि स्त्री के हाथ में शुक्र पर्वत की ऐसी स्थिति हो तो उसे योनी सम्बन्धी रोग होते हैं ।
  • यदि शुक्र और गुरु क्षेत्र उभरे हुए हों तो जातक समाज में ऊँचा पद प्राप्त करता है और लोग उसके सलाह लेना पसंद करते हैं ।
  • यदि शुक्र पर्वत पर सत्रार ( तारे ) का चिन्ह हो तो जातक की माता का स्वर्गवास जातक को वल्यकाल में हो जाता है । प्रेम के मामले में भी जातक को निराशा का सामना करना पड़ता है ।
  • अगर शुक्र पर्वत पर गुणा का निशान हो तो जातक किसी स्त्री के प्रेम में फंसकर कष्ट भोगता है ।
  • यदि शुक्र पर्वत पर वर्ग का निशान हो तो ऐसा व्यक्ति महात्मा अथवा ऋषि होता है ।
  • यदि किसी स्त्री के हाथ में शुक्र पर्वत पर स्पष्ट वृत का निशान हो तो वह पर पुरुषगामिनी होती है । स्त्रियों के हाथ में शुक्र पर्वत का ऊँचा होना ही काफी बनाता है ।
  • यदि किसी पुरुष के हाथ में शुक्र पर्वत पर जाली का निशान हो तो जातक धोखेबाज एवं बदमाश होता है । उसे जेल अथवा पागलखाने भी जाना पड़ता है ।
  • अगर शुक्र पर्वत पर बड़ी-बड़ी आदि व् टेढ़ी रेखाओं से बहुत लम्बी-चौड़ी जली का निशान बन जाए और सूर्य पर्वत भी उठा हुआ हो तो जातक अच्छा गायक एवं अभिनेता हो सकता है ।
  • यदि शुक्र पर्वत पर स्थित तारा से कोई रेखा निकल कर भाग्य रेखा से मिले तो जातक को अपने किसी मृत सम्बन्धी की धन संपत्ति प्राप्ति होने का योग बनता है ।
  • यह शुक्र पर्वत अशुभ हो एवं दबा हुआ हो तो जातक को गुप्त रोग, वीर्य विकार, मूत्र रोग, जननेंद्रिय सम्बन्धी रोग हो सकते हैं ।

शनि का पर्वत

  • हथेली में मध्यमा अंगुली के नीचे हृदय रेखा से ऊपर ब्रहस्पति एवं सूर्य पर्वतों के मध्य में शनि का पर्वत स्थित है । यदि शनि क्षेत्र सामान रूप से उबर हुआ हो तो जातक चिन्ताशील, एकान्तप्रिय, संयमी, चिकित्सिक, रासायनिक, गुप्त विधाओं का ज्ञात होता है । ऐसे व्यक्ति विचारशील, योगाभ्यासी एवं धार्मिक प्रवृति के होते है । यह अपनी पत्नी से इतना प्रेम नहीं करते जितना करना चाहिए ।
  • यदि शनि का पर्वत अत्यधिक विकसित हो तो जातक दुराचारी, व्यभिचारी, कुविचारी, क्रूर कर्म करने वाला, तमोगुणी होता है । ऐसा व्यक्ति वात रोगी, उदार शूल, मूत्राशय का रोगी होती है । संकालु, निर्दयी होती है । यदि कहीं सेवारत हो तो एक बार सस्पैंड जरुर होगा ।
  • यदि शनि पर्वत अधिक नीचे दबा हुआ हो तो जातक आपत्तियों से घिरा रहता है । ऐसा व्यक्ति झूठ बोलने बाला, जुआरी, व्यसनी, अदूरदर्शी, घमंडी, कलंकी, राजदंड पाने वाला होता है ।
  • यदि शनि पर्वत गुरु पर्वत की ओर झुका हुआ हो तो जीवन का पहला आधा भाग कष्ट माय बीतता है । दूसरा आधा भाग सुखमय व्यतीत होता है । इस बिच व्यक्ति की आध्यात्मिक उन्नति होती है ।
  • यदि शनि पर्वत सूर्य पर्वत को और झुका हुआ दिखाई दे तो व्यक्ति उदास प्रकृत्ति का होता है । ऐसा होने पर भी व्यक्ति परिश्रमी और यशस्वी होता है । इनमे यदि शनि पर्वत अत्यधिक उच्च हो तो जातक चरित्रहीन, ठग, धूर्त और निकम्मा होता है ।
  • अगर गुरु और शनि के क्षेत्र सामान रूप से उभरे हुए हों तो जातक विद्वान, धार्मिक विचारों वाला, गुप्त विधाओं का जानकार, धनि होता है । अगर स्त्री के हाथ में ऐसा हो तो वह भगवन का भजन करने वाली होती है ।
  • यदि शनि और मंगल के क्षेत्र सामान रूप सी उभरे हुए हों तो जातक अत्यंत क्रोधी, अत्याचारी, ठग, डाकू, क़त्ल करने वाला, मिथ्याभिमानी एवं नीचों की संगति करने वाला होता है । अकारण झगडा करना इसकी आदत होती है । यह लोग वेश्यागामी होते हैं ।
  • अगर शनि के क्षेत्र पर स्टार ( तारे ) का चिन्ह हो तो ऐसे व्यक्ति को सांप के काटने, बिजली गिरने, हिंसक पशु के काटने, बारम्बार दुर्घटनाग्रस्त होने का भय होता है ।
  • अगर शनि के पर्वत पर त्रिकोण का निशान हो तो जातक ज्योतिष गुप्त विद्या, सामुद्रिक, तंत्र-मन्त्र का ज्ञानी होता है ।
  • शनि पर्वत पर एक सीधी कड़ी रेखा जातक को भाग्यवान बनती है जिससे दिन प्रतिदिन उसकी उन्नति होती है ।
  • शनि क्षेत्र पर क्रास ( गुणा ) अथवा जाली का निशान दुर्भाग्य सूचक गिने गए हैं ।

Author: Good luck

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