हस्त सामुद्रिक

भविष्य जानने की जिज्ञासा मानव में आदि काल से रही है । हस्त रेखाओं के माध्यम से भविष्य सम्बन्धी ज्ञान हो सकता है । ऐसा धीरे – धीरे मानव को पता चल और इस तरह प्राचीन काल में ‘हस्त सामुद्रिक’ अथवा हस्त रेखा विज्ञानं का विकास हुआ । पामिस्ट्री अथवा हस्त रेखा विज्ञानं एक ऐसी कला है जिससे हथेली, अँगुलियों की बनावट तथा हथेली पर बने विभिन्न पर्वत एवं रेखाओं, चिन्हों की उपस्थिति से जातक का चरित्र-चित्रण किया जा सकता है । यह ज्ञान जातक के जीवन में होने वाली घटनाएँ, उसकी विधा, शादी, आर्थिक स्थिति, कारोवार, सामजिक स्थिति पर प्रकाश डालता है ।

हिन्दू संस्क्रति में हाथ में माँ लक्ष्मी, माँ सरस्वती तथा ब्रहम्मा जी का वास माना गया है । इसी वजह से प्रातः उठते ही सर्वप्रथम अपने हाथों का दर्शन करने के लिए कहा जाता है ।

कराग्रे वसते लक्ष्मी, कर मध्ये सरस्वती ।

करमूले स्थितो ब्रहम्मा प्रभाते कर दर्शनं ।।

हाथों के आगे के भाग में लक्ष्मी , मध्य भाग में सरस्वती और मूल में ब्रहम्मा जी का वास है । इस कारण हर रोज सुबह हाथों का दर्शन करना चाहिए । हाथों में तीर्थों का वास भी है । देवतार्थ , पितृतीर्थ , प्रजापति तीर्थ का हाथ दे मध्य में ही वास है जब भी आप किसी का हाथ देखने के लिए पकड़ें तो वह या तो 1. गद्देदार हाथ 2. साधारण परन्तु अच्च्छा हाथ 3. शुष्क , सख्त और खुरदरा हाथ 4. लचकदार हाथ होगा ।

गद्देदार हाथ – ऐसे हाथ वाले व्यक्ति आम तौर पर सुस्त , गैर जिम्मेदार, अयोग्य होंगे । यह लोग मेहनत करना पसंद नहीं करते । बल्कि जीवन की खुशियों का मजा बिना पैसा खर्च किए करना चाहते हैं । न तो दुसरे की मदद करते है और न ही अपनी । इनके दिमाग में चाहे कितना भी ज्ञान का भंडार हो , उसकी अभिव्यक्ति तथा उसका उपयोग करने में यह लोग असमर्थ रहते हैं । यह लोग घरेलू धंधों में उपयोगी सिद्द हो सकते हैं । वैसे इनकी प्रक्रति अच्छी होती है । इनमे सहनशीलता कम होती है जिससे मामूली कठिनाई से भी यह लोग भवरा जाते हैं जिसका हल इनको आसानी से नहीं सूझता है और इधर-उधर सहायता के लिए झाकते हैं ।

साधारण परन्तु अच्छी त्वचा वाला हाथ – यह वक्ती बुद्दिमान, अच्छे विचारों वाले तथा प्रगतिशाली होते हैं । यह लोग शांतिप्रिय होते हैं और किसी भी कीमत पर शांति बनाये रखना चाहते हैं । यह दुष्टों के अच्छे सुझावों को सुनते भी हैं । और मानते भी हैं । यह लोग कड़े शब्द कहना और सुनना पसंद नहीं करते । कल्पनाशील होते हुए भी हर बात को नैतिकता की द्रष्टि से देखते हैं ।

गद्दे दार हाथ – इन लोगों की प्रक्रति भी भद्दी होती है जो इनकी बातचीत और इनके कार्यों से प्रकट होती है । यह लोग रुढ़िवादी होते हैं तथा आसानी से न अपने आप को बदल सकते हैं और न ही दकियानूसी रीती-रिवाज बदलते हैं । जब इनको क्रोध आ जाए तो यह लोग जानवरों की तरह व्यवहार कर सकते हैं । ऐसे हाथ आम तौर दिहाड़ीदार, मजदूरों, मस्त्रियों तथा एनी हाथ के काम करने वाले व्यक्तियों में पाए जाते हैं ।

लचकदार हाथ – यह लोग संतुलित विचारों वाले होते हैं तथा जीवन में बहुत उन्नति करते हैं । इनमे शीघ्र उचित निर्णय लेने क्षमता होती है और यह अपने आप को हर तरह के वातावरण में ढाल लेते हैं । इन लोगों में दूसरों की अपेक्षा सामान्य ज्ञान अधिक होता है तथा यह लोग यथार्थवादी होते हैं । इनोको कोई भी जिम्मेबारी वाली काम सौपा जा सकता है ऐसे हाथ आम तौर पर डाक्टरों, वकीलों, व्यापारियों तथा अन्य उचे पदों पर लगे हुए व्यक्तियों में देखे जा सकते हैं ।

आकार की द्रष्टि से हाथों का वर्गीकरण इस प्रकार है :

  1. वर्गाकार हाथ – इस हाथ वाले व्यक्ति यथार्थवादी होते हैं जो हर काम नियमानुसार करते हैं तथा जीवन में अनुशाशन को मान्यता देते हैं । यह खुले मैदान में योगासन और कसरत करने के शौक़ीन होते हैं तथा इनकी सेहत आम तौर पर अच्छी रहती है। यह लोग स्पष्टवादी, विश्वसनीय होते हैं तथा हर काम को सही ढंग से करने में विश्वास रखते हैं ।
  2. त्रिकोनाकर हाथ – यह व्यक्ति आदर्शवादी एवं कल्पनाशील होते हैं । ऐसे लोग योजना बनाने में एवं लिखने में निपुण होते हैं । यह लोग दिमागी काम अधिक करते हैं तथा कला और साहित्य के शौक़ीन होते हैं ।

वर्गाकार हाथ – इस हाथ वाले व्यक्ति यथार्थवादी होते हैं जो हर काम नियमानुसार करते हैं तथा जीवन में अनुशाशन को मान्यता देते हैं । यह खुले मैदान में योगासन और कसरत करने के शौक़ीन होते हैं तथा इनकी सेहत आम तौर पर अच्छी रहती है। यह लोग स्पष्टवादी, विश्वसनीय होते हैं तथा हर काम को सही ढंग से करने में विश्वास रखते हैं ।

त्रिकोनाकर हाथ – यह व्यक्ति आदर्शवादी एवं कल्पनाशील होते हैं । ऐसे लोग योजना बनाने में एवं लिखने में निपुण होते हैं । यह लोग दिमागी काम अधिक करते हैं तथा कला और साहित्य के शौक़ीन होते हैं । यह कठिनाइयों का सामना करने में प्रायः असफल रहते हैं तथा भावनाओं पर कंट्रोल न होने के कारण शीघ्र क्रोधित हो उठते हैं ।

हाथ को दो भागों में बाँटा गया हैं :

  1. हथेली 2. अंगुलियाँ नाख़ून सहित

अगर हथेली की लम्बाई तथा अँगुलियों की लम्बाई बराबर रहे तो जातक संतुलित चरित्र का होता है। वह गुणवान तथा अच्छी आदतों वाला इन्सान होता है । अगर हथेली , अँगुलियों से बड़ी हो तो व्यक्ति में व्यापारिक बुद्धि होती है जिससे वह हर चीज का मुल्यांकन सही करता है तथा सही निर्णय लेता है। एसा व्यक्ति अपनी भावनाओं में नहीं बहता ।

अगर अँगुलियों वाला भाग हथेली से लम्बा हो तो व्यक्ति सोचता अधिक है काम कम करता है या थोड़े काम को करने में अधिक समय लगता है ।

अगले अध्यायों में हम विस्तार से पढेंगे की हाथ से कैसे भविष्य के वारे में जानकारी विस्त्रित करेंगे ।…

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