पितृऋण एवं ऋणमुक्ति के हक़दार

जब जातक पर उसके पूर्वजों के पापों का गुप्त प्रभाव पड़ता है तब ‘ पितर ‘ या ‘ पितृऋण ‘ कहा जाता है। इस सन्दर्भ में गुनाह कोई करे और उसकी सजा दूसरा भुगते वाली बात होती है। सजा भोगने वाला गुनाह करने वाले का नजदीकी रिश्तेदार ही होता है। यह ऋण रहस्यमय है। इसका विचार जन्मकुंडली से करना चाहिए, वर्षफल जन्मकुंडली से नहीं। इस ऋण का उपाय खून के रिश्तेदार, सगे-सम्बन्धी ही कर सकते हैं । जैसे लड़की, दोहित्री, बहु, पौत्र, पौत्री, पुत्र, पिता, दादा, परदादा, बुआ, पत्नी, भानजा, भानजी आदि । पत्नी के माता-पिता या एनी कोई इसका हकदार नहीं बन सकता । यानी जातक के ससुराल वाले पितृ ऋण के उपाय नहीं कर सकते ।

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ग्रहों से संबंध ऋण व् उपाय

कौन सा गृह किस प्रकार के ऋण से सम्बन्ध है । तथा उसका उपाय क्या है ? यहाँ इसी बारे में विचार किया जा रहा है ।

सूर्य- जन्मकुंडली के पांचवे घर में पापी गृह या शुक्र हो तो ‘स्वऋण ‘ रहेगा । एसा जातक नास्तिक होता है । धर्म की अवहेलना-तिरस्कार करनेवाला होता है । उसका अन्तः करण भी विकारग्रस्त रहता है । ऐसे जातक के घर में जमीन में गड़ा हुआ या खुला चूल्हा होगा । घर की छत से नीचे आने के लिए कई रस्ते होते हैं । ऐसा जातक राजभय, क़ानूनी मुकद्दमेबाजी, कर (टेक्स ) एवं दंड, शारीरिक कमजोरी, ह्र्दयरोग, व्यर्थ संघर्ष में रत रहता है । जातक को स्वयं निर्दोष होते हुए भी दंड-सजा भोगनी पड़ती है ।

उपाय : यह ऋण चुकाने के लिए परिवार के सदस्यों से आर्थिक मदद लेकर होम-हवनादि करना चाहिए । इस यज्ञकर्म का खर्च सभी को सामान वहन करना चाहिए ।

चन्द्र- यह मातॢऋण दर्शाता है । जन्मकुंडली दे चौथे घर में केतु हो तो मातॢऋण अवश्य होता है । मातॢऋण के कारण जातक माता के विषय में बेपरवाह रहता है । माता के सुख-दुःख का वह ख्याल नहीं रखता। अपनी सन्तान होने के बाद माँ को अलग कर देता है या घर से निकल देता है । जातक के घर के पास कुआं, तालाब, नाला या नदी बहती है। इन जलाशयों का पूजनादि करने के बजाय गंदगी डालने के लिए उपयोग किया जाता है। ऐसे जातक को दूसरों से किसी भी प्रकार की सहायता नहीं मिलती। उसके सभी प्रयास निष्फल होते हैं । कर्जा चुकता करने, बीमारी का इलाज करने, सरकारी कर-दंड चुकता करने में पैसा खर्च होता है । ऐसा जातक कभी शांति से नहीं रहता और न किसी को शांति से रहने देता है ।

उपाय : मातॢऋण से मुक्ति पाने के लिए परिवार के सदस्यों से सामान रूप से चाँदी इकट्ठी करके एक ही दिन यह सब छड़ी बहते पानी में बहा देनी चाहिए ।

मंगल- मंगल परिवार के ऋण का प्रतीक है । जातक की जन्मकुंडली में पहले या आठवें घर में बुध या केतु बैठा हो तो परिवार का ऋण रहता है। इस ऋण की पहिचान निम्न बैटन से की जा सकती है:

1- जातक को हर प्रकार की सुख-सम्रद्धि प्राप्त होती है । यह मिलता है, प्रगति होती है और एक दिन सब कुछ चला जाता है । फिर इतना दुःख भोगना पड़ता है जिसकी कल्पना मात्र से ह्रदय कांप उठता है ।

२- मित्र शत्रुवत बर्ताव करते हैं । कहीं से भी किसी भी प्रकार की मदद नहीं मिलती ।

३- उम्र के 28 से लेकर 36 वर्ष तक यह सब भोगना पड़ता है । 28 वां वर्ष प्रारंभ होते ही दुखों का सिलसिला शुरू हो जाता है ।

उपाय : परिवार के सभी सदस्य मिलकर धन इकट्ठा करें और यह रकम गक्टर के कार्य में सहयोग करने की द्रष्टि से दवाइयां तैयार करने के लिए दान करें ।

बुध- बुध बहन का ऋण दिखता है । बहन या पुत्री की हत्या होना या उन पर अत्याचार होना, जवानी में दगा हुआ हो, खोए होए छोटे बालकों को अपने कब्जे में लेकर उनको बेच दिया हो या लालच में आकर उनका बदला ( प्रतिशोध ) लिया हो । लड़का हो या लड़की, उनकी तकलीफों का सामना करना पड़े, आर्थिक द्रष्टि से बेहाल हो जाये तो 48 वर्ष की उम्र होते-होते जीने की इच्छा या उमंग हो नहीं रहती । ससुराल में या ननिहाल में कोई भी जीवित नहीं रहता । मदद करने वाले उपलब्ध नहीं होते ।

उपाय: परिवार के सभी सदस्य पीले रंग की कौड़ियाँ इकटठा करें , उनमें दो कौड़ियाँ पास में रखकर बाकी बहते पानी में बहा दें ।

ब्रहस्पति- ब्रहस्पति के कारण पितृऋण का संकेत मिलता है । जन्मकुंडली में 2, 5, 9, या 12 घर में शुक्र, बुध या रहू हो तो पिता का ऋण रहता है ।

पितृऋण की पहचान निम्नानाकित बातों से की जाती है :-

1-निःसंतान होने के कारण या एनी किसी कारण परिवार के कुलगुरु या ब्राह्मण बदलना ।

2-अपने घर या पड़ोस के मंदिर या पीपल के पेड़ को नष्ट किया हो ।

3-जब तक जातक के बाल सफ़ेद न हो जाएँ तब तक ही घर में सम्पन्नता रहे, अन्यथा सभी कार्यों में अवरोध, दुःख, निराशा एवं मानहानि सहनी पड़े ।

4-इतनी आर्थिक बहाली देखनी पड़े कि पीतल, लोहे, जस्ते एवं सोना पीतल जैसा बन जाए ।

उपाय: इस ऋण से मुक्ति पाने के लिए परिवार के सभी सदस्यों से एक-एक रुपया इकट्ठा करके मंदिर में दान दें । अपने माकन से सोलह कदम चलने के बाद जो मंदिर या पीपल का पेड़ हो उसकी देखभाल करें ।

शुक्र- शुक्र स्त्री का ऋण बताता है । दुसरे या सातवें घर में सूर्य, रहू या चन्द्र हो तो स्त्री का ऋण समझना चाहिए ।

स्त्री ऋण की पहिचान निम्न तरह से भी होती है:-

1-लालच के कारण गर्भवती स्त्री की हत्या हुई हो या उसे मारा-पिटा हो ।

2-अपने घर में कोई मंगल कार्य संपन्न हो रहा हो तब नजदीकी रिशेदार के यहाँ कोई मौत हुई हो ।

3-सुख में दुःख, विवाह के अवसर पर म्रत्यु, बिना कारण हर कोई रो दे ।

उपाय: – इस ऋण से मुक्ति पाने के लिए परिवार के सभी सदस्यों से धन इकट्ठा करदे सौ गायों को चारा खिलाएं ।

शनि– निर्दयी का ऋण शनि के कारण उत्पन्न होता है । जन्मकुंडली के दसवें या ग्यारहवें घर में सूर्य, चन्द्र या मंगल हो तो निर्दयी ऋण होता है, इस ऋण की पहिचान इस प्रकार से होती है ।

1-जीव हत्या की हो, संपत्ति धोखे से हडप ली हो ।

2-प्रवेशद्वार दक्षिण में हो या बाँझ से जमीं लेकर उस पर माकन बनाया हो ।

3-रस्ते पर या कुओं को ढककर उस पर माकन बनाया हो ।

4-व्यवसाय स्थल में आग लगे और उसे बुझाने का प्रबंध न हो, घर बनाने तक बरसात हो जाये और वह जल्द बंद न हो, खुद के बच्चों को और ससुरालवालों को पुलिस परेशां करे, योग्य सन्तान नालायक बने, घर के लोग आराम से सो न सकें, सो गए तो उनका उठाना मुश्कल हो जाता है ।

5-अनेक प्रकार की परेशानियाँ उत्पन्न हों, परिवार के सदस्यों की संख्या घ जाये और उसका कोई कारण समझ में न आए ।

उपाय: – घर के सभी लोगों से धन एकत्र करके सौ मजदूरों को खाना खिलाएं । अगर मासाहारी हो तो सौ स्थानों से मछलियाँ इकटठी करके परिवार के सभी सदस्यों को भोजन कराएं ।

अजन्माकृत ऋण

जन्मकुंडली के बारहवें घर में सूर्य, शुक्र या मंगल हो तो अजन्माकृत ऋण होता है ।

इस अजन्माकृत ऋण की पहिचान निम्न लक्षणों से भी की जाती है ।

1-ससुराल पक्ष की और से जातक के प्रति विस्वासघात हुआ हो, उसका सभी तरफ से विश्वास उठ गया हो और जिसकी वजह से परिवार व्र्बाद हो जाये ।

2-माकन के प्रवेश द्वार की दहलीज के निचे से गन्दा पानी बहता हो ।

3-माकन की दक्षिण दिशा की दीवार की और वीराना, कब्रिस्तान हो या भ्द्भूजे की भट्ठी हो ।

4-माकन या कार्यालय में अचानक आग लग जाए, विश्वासघात या दगाबाजी के कारण धन का नाश हो, 19 से 21 वर्ष के युवा रिश्तेदार दे मस्तक पर घाव हो या वह रोग के कारण बुध दिखाई पड़े ।

5-समझ-बुझकर किए कामों में भी घटा हो, खून के रिश्तेदार भी परीशां रहें, कोर्ट-कचहरी के मामलों में पराजित हो, निर्दोष होते हुए भी सजा या दंड भुगतना पड़े । औलाद सुंदर परन्तु रोगी हो ।

उपाय:- कुटुंब के प्रत्येक व्यक्ति से एक-एक नारियल लेकर उन्हें एक साथ एक ही दिन बहते पानी में प्रवाहित करें ।

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